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आत्मनिर्भरता की मिसाल बने अर्पित, भगवान बिरसा मुण्डा योजना से शुरू किया अमूल पार्लर

By Admin|30 May 2026, 9:12 AM
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सफलता की कहानी

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भगवान बिरसा मुण्डा योजना से झाबुआ के अर्पित बने आत्मनिर्भर

 शुरू किया अमूल पार्लर
अब हर माह कमा रहे 25 हजार रुपए

भोपाल 

जिंदगी में अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा हर इंसान के मन में होती है। हर व्यक्ति आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहता है, लेकिन सफलता उसी को मिलती है जो अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर निरंतर मेहनत करता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झाबुआ के वार्ड क्रमांक 16, मेघनगर नाका, के अर्पित पिता पारसिंह मचार की। उन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सतत् प्रयास किया। अर्पित ने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद निजी क्षेत्र में कार्य किया, लेकिन वे अपने कार्य से पूर्णतः संतुष्ट नहीं थे। उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की इच्छा थी। इसी उद्देश्य से उन्होंने अमूल पार्लर (मिल्क पार्लर) प्रारंभ करने का निर्णय लिया। व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता होने पर उन्होंने शासन की “भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना” के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय में संपर्क किया।

5 लाख के ऋण से शुरू किया अमूल पार्लर, अब हर माह हो रही 25 हजार रूपये की आय

मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ द्वारा भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना अंतर्गत ऋण प्रकरण एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक, राजवाड़ा शाखा, झाबुआ को प्रेषित किया गया। बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण करने के उपरांत अर्पित को 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण स्वीकृति प्राप्त होने के तुरंत बाद अर्पित ने अमूल पार्लर प्रारंभ कर अपना व्यवसाय शुरू किया। आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को सहायक के रूप में रोजगार भी प्रदान किया है।

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रोजगार की तलाश से आत्मनिर्भरता तक, अर्पित ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश

 अर्पित का कहना है कि पहले वे रोजगार की तलाश में भटकते थे, लेकिन आज स्वयं का व्यवसाय संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका मानना है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने का जज्बा हो तो सफलता अवश्य मिलती है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

''भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार'' योजना के बारे में जानकारी

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से “भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना” संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र युवाओं को स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना के अंतर्गत विनिर्माण इकाई स्थापित करने हेतु 1 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही हितग्राहियों को 7 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है तथा गारंटी फीस का भुगतान मध्यप्रदेश शासन द्वारा किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य होना अनिवार्य है। आवेदक की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही आवेदक के पास अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र, वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम होने का प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, कक्षा 8वीं उत्तीर्ण की अंकसूची, बैंक पासबुक की छायाप्रति, आधार कार्ड, पैन कार्ड, समग्र आईडी, राशन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो एवं मोबाइल नंबर होना आवश्यक है।

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इस योजना में सेवा इकाई एवं खुदरा व्यवसाय के लिए भी 1 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत ब्यूटी पार्लर, वाहन मरम्मत, साइकिल रिपेयरिंग, किराना दुकान, फोटोकॉपी, फोटोग्राफी, ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस, मोटरसाइकिल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, टेंट हाउस, ढाबा, होटल आदि व्यवसाय शुरू किए जा सकते हैं। वाहन संबंधी योजनाओं के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य रहेगा। पात्र युवक-युवतियां एमपी ऑनलाइन के माध्यम से अथवा अपने जिले के आदिवासी वित्त विकास निगम कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। 

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