मध्य प्रदेशराज्‍य

शिप्रा डैम जल वितरण को लेकर विवाद, देवास में विरोध तेज; मांगलिया पंचायत को पानी देने पर सवाल

By Admin|29 May 2026, 2:42 PM
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देवास
 शिप्रा डैम से मांगलिया पंचायत को पानी देने के मामले में देवास नगर निगम के जिम्मेदार घिरे हुए हैं। नेता सत्तापक्ष के विरोध के बाद अब चौतरफा विरोध हो रहा। पूर्व महापौरों ने मोर्चा संभालकर प्रतिक्रियाएं देना शुरू की हैं और देवास में जलसंकट की आशंका जताई है।

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सांसद ने भी एमआईसी के निर्णय को गलत बताया है। पूरी निगम परिषद बैकफुट पर है। विधायक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जल संसाधन मंत्री के दबाव में यह सब किया जा रहा है।

बता दें कि गत दिनों एमआइसी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके तहत शिप्रा डैम से 2.20 एमएलडी पानी मांगलिया पंचायत को दिया जाएगा। महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने बताया था कि एनवीडीए और मांगलिया पंचायत के बीच यह करार हुआ है। देवास के हिस्से का पानी नहीं दिया जाएगा। एनवीडीए अलग से पानी देगा, जो मांगलिया तक जाएगा।

यह देवासवासियों के साथ अन्याय है
देवास का काम बस ये रहेगा कि शिप्रा डैम में पानी स्टोर करना है। बदले में मांगलिया पंचायत से मेंटेनेंस शुल्क लिया जाएगा। इस निर्णय के बाद भाजपा नेता ही विरोध में आए। सबसे पहले नेता सत्तापक्ष मनीष सेन ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और कहा कि यह देवासवासियों के साथ अन्याय है। इस पर पुनर्विचार किया जाए। हालांकि अगले ही दिन सेन ने इंटरनेट मीडिया में वीडियो प्रसारित कर बात पलट दी और कहा कि मुझे विषय की पूरी जानकारी थी, इसलिए पत्र लिखा था। अब लोग कह रहे कि इस वीडियो जारी करने के पीछे राजनीतिक दबाव है या स्वेच्छा, क्योंकि यदि एेसा था तो पहले पत्र क्यों लिखा।

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पूर्व महापौर ने लिखा पत्र
 पूर्व महापौर सुभाष शर्मा ने निगमायुक्त दलीप कुमार व महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल के नाम पत्र लिखा है। हालांकि पत्र में तारीख तो ठीक है,लेकिन 2025 लिख दिया। इस पर ट्रोल भी हुए। पत्र में उल्लेख किया कि शिप्रा डेम से इंदौर के अन्य क्षेत्रों को पानी देने की योजना पर काम हो रहा है। इसके बाबद देवास नगर निगम से एनओसी या अनुमति मांगी गई है।

बढ़ते हुए देवास शहर को पेयजल देने के साथ ही इंडस्ट्रीज में भी शिप्रा डेम में वाटर सप्लाय होता है। पहले भी आसपास के कई गांवों से मांग आई थी कि हमें पानी दिया जाए, लेकिन डेम की क्षमता देखते हुए ज्यादा पानी स्टोर नहीं किया जा सकता। इसलिए डेम से दूसरे स्थानों को पानी देने से सारी व्यवस्था चौपट हो जाएगी। इंदौर जिले के गांवों में इंदौर नगर निगम या नर्मदा माइक्रो से पानी दिया जा सकता है।

पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी
इंदौर निगम की सीमा देवास नाका तक है, जो मांगलिया से दो किमी दूर ही है। इसलिए इस प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। एमआईसी प्रस्ताव पास करती है तो विशेष सम्मेलन बुलाकर पक्ष-विपक्ष से विचार-विमर्श कर ही निर्णय लें। पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी। कहा कि चालीस-पचास सालों के संघर्ष के बाद हमारे कार्यकाल में शिप्रा डेम की सौगात मिली थी। इसके जल का उपयोग स्थानीय लोगों के लिए करना होगा, दूसरे शहर या गांवों के लिए नहीं। वरना जनता को परेशान होना पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष अहिल्या पंवार ने भी उक्त निर्णय के विरोध में पत्र लिखा है।

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विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए
सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है क्योंकि महापौर से मेरी बात ही नहीं हो पाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए। देवास में खुद ही जलसंकट है, एेसे में यहां का पानी कहीं और देना देवास की जनता के साथ अन्याय होगा। एेसा निर्णय होता है तो मैं विरोध करूंगा। देवास की जनता के साथ खडा़ हूं। फिलहाल आधिकारिक रूप से मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया। कांग्रेस नेता पं. रितेश त्रिपाठी के नेतृत्व में खेड़ापति मंदिर के बाहर कांग्रेसजन एकत्र हुए। यहां एमआइसी के निर्णय के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया। पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह अभियान निरंतर चलेगा। त्रिपाठी ने बताया कि एमआइसी ने गलत निर्णय लिया है। देवास के हिस्से का पानी दूसरे जिले के गांवों को देना गलत है।

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