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ISRO प्रोजेक्ट में सफलता: BIT मेसरा के वैज्ञानिकों ने चंद्र क्रेटर डिटेक्शन सिस्टम बनाया

By Admin|17 May 2026, 3:51 PM
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रांची

 BIT मेसरा के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद क्रेटरों (गड्ढों) की पहचान और विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। यह शोध भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-2 अनाउंसमेंट आफ आर्पच्युनिटी (AO) प्रोग्राम के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है।

इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का संचालन प्रमुख अन्वेषक डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. मिली घोष, एसोसिएट प्रोफेसर, रिमोट सेंसिंग एंड जियोइंफार्मेटिक्स विभाग के मार्गदर्शन में किया गया। इस परियोजना में मीमांसा सिन्हा, पीएचडी शोधार्थी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चंद्रायन-2 के डेटा का हुआ इस्तेमाल
शोधकर्ताओं ने चंद्रयान-2 के टीएमसी-2 डीईएम डेटा का उपयोग करते हुए चंद्र सतह के छोटे एवं जटिल क्रेटरों की पहचान के लिए एक अनुकूलित डीप लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया। अध्ययन में विभिन्न डीप लर्निंग माडल का परीक्षण किया गया, जिसमें मास्क आर-सीएनएन विद रेसनेट-101 बैकबोन ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

शोध में पाया गया कि डिजिटल एलिवेशन माडल (डीईएम) आधारित तकनीक पारंपरिक इमेज आधारित पद्धतियों की तुलना में अधिक सटीक और भू-आकृतिक रूप से प्रभावी है। इससे क्रेटरों की सीमाओं, गहराई और क्षतिग्रस्त क्रेटरों की पहचान बेहतर तरीके से संभव हुई।

हाई-रिजॉल्यूशन कैटलॉग तैयार
इस परियोजना के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने टीएमसी-2, लोला, सेलीन और एनएसी जैसे बहु-सेंसर डेटा का एकीकृत उपयोग कर क्रेटर डिटेक्शन की नई कार्यप्रणाली तैयार की। साथ ही, व्यास, गहराई, ढाल, वृत्ताकारता और सतही खुरदरापन जैसे मापदंडों के स्वचालित विश्लेषण के लिए एक विशेष मार्फोमेट्रिक एक्सट्रैक्शन फ्रेमवर्क विकसित किया गया।

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टीम ने क्रेटर मार्फो नामक एक विशेष आर्क जीआइएस प्रो-टूलबाक्स भी तैयार किया है, जो आटोमेटिक क्रेटर विश्लेषण में सहायक होगा। इसके माध्यम से एक किलोमीटर आकार के क्रेटरों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैटलाग तैयार किया गया है।

डेटा कलेक्शन में मिलेगा मदद
शोध में यह भी सामने आया कि केवल एक डेटा सेट पर निर्भर रहने से सेंसर रिजॉल्यूशन और कवरेज से संबंधित व्यवस्थित त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए बहु-स्रोत डेटा आधारित विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय माना गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आगामी दिनों इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि तकनीक का भरपूर उपयोग हो सके और डेटा संग्रहण की प्रक्रिया भी आसान हो पाए।

यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है। -डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, बीआइटी मेसरा।

 

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