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Multi-Cropping: इस किसान ने खेत को इस विधि का उपयोग कर बनाया ‘कमाई की मशीन’, हर सीजन होगी तगड़ी कमाई

By News Desk|13 May 2026, 7:20 PM
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Multi-Cropping: उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के झंझरी ब्लॉक में स्थित केशवपुर गाँव के एक युवा किसान ने अपनी कड़ी मेहनत और सूझबूझ से खेती-बाड़ी का नज़ारा ही बदल दिया है। जहाँ ज़्यादातर किसान सिर्फ़ एक ही फ़सल पर निर्भर रहते हैं, वहीं इस युवा किसान ने एक ऐसी ‘मल्टी-क्रॉपिंग’ (बहु-फ़सल) प्रणाली की शुरुआत की है, जिसमें वह गन्ने के साथ-साथ मूंग (हरी दाल), भिंडी, घुइयां (अरबी) और चारी (ज्वार का चारा) भी उगाते हैं। इस नई और अनोखी तकनीक की बदौलत, अब वह हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं।

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Multi-Cropping: ‘मल्टी-क्रॉपिंग’ विधि

शुरुआत में वह पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिसमें वह सिर्फ़ गन्ना उगाते थे; लेकिन इससे उनकी आमदनी काफ़ी कम होती थी। खेती की बढ़ती लागत और घटते मुनाफ़े को देखते हुए, उन्होंने अपने खेती करने के तरीकों में बदलाव लाने का फ़ैसला किया। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अमल करते हुए, उन्होंने ‘मल्टी-क्रॉपिंग’ को अपनाया।

Multi-Cropping: ज़मीन का बेहतरीन इस्तेमाल

इस प्रणाली के तहत, उन्होंने गन्ने के साथ-साथ मूंग, भिंडी और घुइयां उगाना शुरू किया, और साथ ही चारी (चारा) भी उगाया। इस तरीके से उनकी ज़मीन का बेहतरीन इस्तेमाल हो पाया और उन्हें एक ही समय में कई फ़सलों से आमदनी होने लगी। मूंग की फ़सल जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे उन्हें जल्द ही पैसे मिलने लगते हैं; वहीं, भिंडी और घुइयां से उन्हें लगातार आमदनी होती रहती है, जबकि गन्ना उन्हें लंबे समय में काफ़ी ज़्यादा मुनाफ़ा देता है।

Multi-Cropping: पारंपरिक तरीके से खेती

वह पिछले सात सालों से खेती कर रहे हैं। हालाँकि शुरुआत में वह पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, लेकिन तीन साल पहले उन्होंने ‘मulti-क्रॉपिंग’ को अपना लिया इस बदलाव की वजह से उनकी आमदनी में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और अब वह हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं।

Multi-Cropping: रासायनिक खादों का इस्तेमाल

प्रिंस सिंह आगे बताते हैं कि वह अपने खेत में रासायनिक खादों का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं। वह अपनी खेती-बाड़ी का काम ज़्यादा से ज़्यादा जैविक (organic) तरीकों से करने की कोशिश करते हैं। इस तरीके से मिट्टी की उर्वरता (उपजाऊपन) बनी रहती है और फ़सल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे उन्हें बाज़ार में अपनी फ़सल के अच्छे दाम मिलते हैं।

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Multi-Cropping: खर्चा

लगभग तीन बीघा ज़मीन पर ‘मulti-क्रॉपिंग’ करने में उन्हें करीब 10,000 से 15,000 रुपये का खर्च आता है। प्रिंस सिंह का कहना है कि बहु-फसली खेती ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद की है। अलग-अलग तरह की फसलों की खेती से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की ज़रूरत कम हो जाती है। इस तरीके से, अब वे हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं।

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