छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

सुशासन की रफ़्तार 12 किमी का मुश्किल सफर अब अनिल के लिए हुआ आसान

By Admin|10 May 2026, 11:21 AM
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बिलासपुर

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हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो कोई भी बाधा सपनों को नहीं रोक सकती। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम नागपुरा के रहने वाले अनिल कुमार की कहानी आज इसी बदलाव की गवाही दे रही है। सुशासन तिहार के माध्यम से मिली एक मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल ने न केवल अनिल के रास्ते की दूरी कम की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है।

चुनौतियों से भरा था शिक्षा का पथ     

अनिल कुमार 12वीं कक्षा के छात्र हैं और 70 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उनके मन में पढ़ने की तीव्र इच्छा है। लेकिन उनके घर से स्कूल की दूरी 12 किलोमीटर है। रोज़ लंबी दूरी तय करना, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और स्कूल पहुँचने के लिए दूसरों पर निर्भरता अनिल की पढ़ाई में बड़ी बाधा थी। अनिल के परिवार वाले भी उनकी सुरक्षा और पहुँच को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे।

समाधान शिविर में मिली त्वरित राहत   

बानाबेल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् समाधान शिविर अनिल के जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अनिल ने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। शासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही आवेदन का निराकरण किया और अनिल को मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल प्रदान की।

आत्मनिर्भरता की नई मुस्कान     

ट्राइसिकल की चाबी मिलते ही अनिल के चेहरे पर जो चमक दिखी, वह आत्मनिर्भर होने के गर्व की थी। अब अनिल बिना किसी मानवीय सहारे के स्वयं वाहन चलाकर समय पर स्कूल पहुँच सकेंगे। पहले स्कूल पहुँचना ही सबसे बड़ी चुनौती थी, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब मेरी मुश्किलें आसान हो गई हैं। अनिल कुमार ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मेरे सपनों को नई रफ़्तार दी है।

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