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झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, साइबर फ्रॉड केस निपटाने के लिए बनी नई व्यवस्था

By Admin|09 May 2026, 7:43 PM
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 रांची

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राज्य में इलेक्ट्रानिक लेनदेन तथा साइबर फ्राड की शिकायतों का शीघ्र निपटारा होगा। राज्य सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के रूप में सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव को प्राधिकृत किया है।

झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के सेक्शन 46 के प्रविधान के तहत एडजुडिकेटिंग आफिसर के कर्त्तव्यों के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने व सुनवाई को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी गई है।

इस एसओपी पर विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली गई है। इससे पहले इसपर विधि विभाग से वेटिंग कराकर कानूनी तौर पर सत्यापित भी कराया गया है।

यह एसओपी सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के तहत शिकायतों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी, यूनिफार्म और कानूनी रूप से सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से नागरिकों, बिज़नेस मैन और सरकारी संस्थाओं के लिए शिकायतों की प्रक्रियाओं को आसान बनाना गया है।

इसका उद्देश्य शिकायतों का समय पर और अच्छे से निपटारा सुनिश्चित करना तथा डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम में भरोसा मजबूत करना है। इस एसओपी के माध्यम से आइटी एक्ट के तहत फाइल की गई वैसी सभी शिकायतों का निपटारा एडजुडिकेटिंग आफिसर द्वारा किया जाएगा, जहां नुकसान या मुआवजे का दावा पांच करोड़ रुपये से ज़्यादा नहीं है।

बताते चलें कि राज्य में एडजुडिकेटिंग आफिसर के रूप में विभाग के सचिव की नियुक्ति तो हुई थी, लेकिन एसओपी नहीं होने से एक्ट का अनुपालन नहीं हो रहा था।

यह होगा केस प्रोसेसिंग फ्रेमवर्क
किसी शिकायत के निपटारा के लिए फोरा (एफओआरए : फाइलिंग, आब्जेक्शन, रजिस्ट्रेशन, और एलोकेशन प्रोसीजर) सिस्टम को अपनाया जाएगा। शिकायतें एडजुडिकेटिंग आफिसर के कार्यालय में मैनुअल या आनलाइन सिस्टम के ज़रिए दर्ज कराई जाएंगी। शिकायतें निर्धारित फारमेट में ही जमा होंगी।

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साथ ही निर्धारित शुल्क तथा आवश्यक दस्तावेज की स्वअभिप्रमाणित प्रति जमा करना होगी। शिकायतकर्ता को एक सही तरह से हस्ताक्षर किया हुआ शपथपत्र और पता और संपर्क की पूरी जानकारी देनी होगी। शुल्क डिमांड ड्राफ्ट या चालान से या आनलाइन जमा होगा।

शिकायतकर्ता और प्रतिवादी को दिया जाएगा यूनिक केस नंबर
सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग का अधिकृत प्रशाखा पदाधिकारी प्राप्त शिकायत और दस्तावेज की शुरुआती जांच करेगा। अगर शिकायत पूरी है,तो उसे रजिस्टर किया जाएगा तथा शिकायतकर्ता को एक यूनिक डायरी नंबर या केस नंबर दिया जाएगा।

केस नंबर सभी संबंधित पार्टियों को भी बताया जाएगा। अधूरे आवेदन को लागू नियमों के अनुसार सुधार के लिए वापस किया जा सकता है या रद किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।

प्रतिवादी तय तारीख पर आवश्यक दस्तावेज के साथ एक लिखित जवाब जमा करेगा। उसपर शिकायतकर्ता भी जवाब दे सकता है तथा एडजुडिकेटिंग आफिसर की अनुमति से अन्य दस्तावेज भी फाइल कर सकता है।

सुनवाई ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों हो सकती है
सुनवाई ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों हो सकती है। सुनवाई के दौरान पार्टियां डाक्यूमेंट्री सबूत, टेक्निकल रिकार्ड, गवाह आदि प्रस्तुत कर सकती हैं। सुनवाई की कार्यवाही को डिजिटल रिकार्ड के रूप में मेंटेन किया जाएगा।

सुनवाई के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर केस के तकनीकी, वित्तीय और विधिक पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसमें विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया जा सकेगा। जांच के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर रूल-5 के तहत लिखित आर्डर पास करेगा। इसे आफिशियल डिपार्टमेंट पोर्टल पर अपलोड भी किया जाएगा।

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