छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

शारीरिक संबंध से रोकने को अदालत ने माना मानसिक उत्पीड़न, तलाक हुआ स्वीकार

By Admin|18 Nov 2025, 9:43 AM
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बिलासपुर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी का पति से शारीरिक संबंध न बनाने को मानसिक क्रूरता माना है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पति की दायर अपील पर तलाक का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना उसके साथ मानसिक क्रूरता है।

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जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि 11 साल अलगाव और पत्नी की शारीरिक संबंध के लिए ईच्छा न होना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। विवाह के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई थी।

यह था पति और पत्नी के बीच पूरा मामला

दरअसल अंबिकापुर के शख्स की शादी 30 मई 2009 को रायपुर की महिला के साथ हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के एक महीने बाद ही उसे पत्नी मायके चली गई। जिस पर उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए आवेदन दिया।

पत्नी पर आरोप लगाया कि वह वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार कर रही है। महिला ने पति को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर  वो शारीरिक संबंध बनाएगा तो अपना जीवन खत्म लेगी। पति की कई कोशिशों के बाद भी पत्नी मायके से वापस नहीं लौटी।  केस दर्ज होने के बाद भी उसने कभी पति से संपर्क नहीं किया। महिला ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

फैमिली कोर्ट की सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि उसका पति एक साध्वी का भक्त हैं और वो वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखते ।  आरोप लगाया कि पति बच्चे नहीं चाहता था। पत्नी ने पहले वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी भी लगाई, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज कर दिया।

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पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी

पति फैमिली कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। कहा कि फैमिली कोर्ट ने उनके तर्कों को सुने बगैर ही तलाक की अर्जी खारिज की है। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए पाया कि पति-पत्नी 11 सालों से अलग रह रहे हैं। पत्नी ने माना कि वह अब पति के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहती। हाईकोर्ट ने अलगाव के लंबे अंतराल को मानसिक क्रूरता माना और पति की तलाक की अपील को स्वीकार किया।

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