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CG : गोगुण्डा में ‘हरा सोना’ तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू…

By lokesh sharma|03 May 2026, 12:52 PM
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गोगुण्डा में थमी बंदूकों की गूँज, अब गूँजेंगे मनोरंजन कक्ष में गीत

सुकमा । सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड का अंतिम छोर, जहाँ कभी नक्सलियों की समानांतर सत्ता चलती थी, आज वहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद के खात्मे के बाद, पहाड़ियों के बीच बसी गोगुण्डा पंचायत और आश्रित गांव मीचिगुड़ा में शासन की योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा यहाँ लगभग 1 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है, जिससे दशकों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे 1642 ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

प्रशासन की इस पहल में मानवीय संवेदनाओं का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में यहाँ केवल ईंट-पत्थरों के भवन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की खुशियों के केंद्र भी बनाए जा रहे हैं। पंचायत में पीडीएस भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी के साथ-साथ एक अत्याधुनिक मनोरंजन कक्ष का निर्माण किया जा रहा है। नवाचार के तहत यहाँ बड़ी स्क्रीन वाली टीवी लगाई जाएगी, जहाँ ग्रामीण पहली बार सामूहिक रूप से फिल्में, क्रिकेट मैच और समाचार देख सकेंगे और देश दुनिया से की ख़बरों से जुड़ेंगे, जो उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन को एक नई दिशा देगी।

आर्थिक मोर्चे पर गोगुण्डा ने इतिहास रच दिया है। डीएफओ अक्षय भोंसले के मार्गदर्शन में आजादी के बाद पहली बार इस पंचायत में तेंदुपत्ता की खरीदी 27 अप्रैल से शुरू हो गई है। पूर्व सरपंच माड़वी देवा भावुक होकर बताते हैं कि पहले डर के साये में जीना पड़ता था, लेकिन अब ग्रामीण निडर होकर फड़ तक पहुँच रहे हैं। करीब 200 कार्डधारी परिवारों के लिए यह न केवल आजीविका का साधन बना है, बल्कि इसने वर्षों के अलगाव को भी समाप्त कर दिया है। ग्रामीण अब अपने पसीने की कमाई का उचित दाम पाकर स्वावलंबी बन रहे हैं।

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इस बदलाव में श्महिला सशक्तिकरणश् की तस्वीर भी बेहद सुखद है। फड़ मुंशी के रूप में मुचाकी गंगी की नियुक्ति ने यह संदेश दिया है कि बस्तर की महिलाएं अब नेतृत्व करने को तैयार हैं। मुचाकी देवे और हेमला मंगला जैसी कई ग्रामीण महिलाएं खुश हैं कि उन्हें घर के पास ही रोजगार मिल रहा है। गांव में महज दो महीने पहले पहुंची बिजली ने उनके अंधेरे जीवन को रौशन कर दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण केवल महुआ और इमली पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि शासन की योजनाओं से जुड़कर मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य गोगुण्डा जैसे सुदूर क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। शासन के निर्देशानुसार यहाँ बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ ग्रामीणों के सामाजिक उत्थान के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। आजादी के बाद पहली बार यहाँ तेंदुपत्ता खरीदी का प्रारंभ होना और मनोरंजन कक्ष जैसा नवाचार, स्थानीय लोगों के प्रशासन पर बढ़ते भरोसे का प्रतीक है। हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि अंतिम छोर के हर व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएँ सुगमता से पहुँचें।

गोगुण्डा का यह कायाकल्प बस्तर में बदलते हालातों की जीवंत मिसाल है। जहाँ पहले सड़कें कटी थीं और बिजली का नामोनिशान नहीं था, वहाँ अब कनेक्टिविटी और निर्माण कार्यों की गति ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति गहरा विश्वास पैदा किया है। विकास की इस बयार ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो घोर नक्सल प्रभावित इलाकों को भी खुशहाली और शांति के टापू में बदला जा सकता है। मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते ग्रामीणों की मुस्कान इस सफलता की सबसे बड़ी गवाही है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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