छत्तीसगढ़

हर बूंद से अधिक उत्पादन’ की ओर कदम: बगिया समृद्धि योजना से हजारों हेक्टेयर भूमि को मिलेगा पानी – मुख्यमंत्री साय

By Admin|01 May 2026, 11:16 PM
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रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के अंतर्गत बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन से जशपुर जिला देश के लिए आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का मॉडल बनेगा और किसानों को समृद्धि की नई दिशा मिलेगी। 
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भूमिगत पाइपलाइन व्यवस्था से जल का अपव्यय रुकेगा, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की समस्या भी नहीं आएगी। अब तक वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को इस योजना से वर्षभर सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना न केवल सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि कृषि को तकनीक आधारित, टिकाऊ और लाभकारी दिशा में आगे बढ़ाएगी। यह परियोजना जशपुर को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल एग्री-इरीगेशन डिस्ट्रिक्ट के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारे अन्नदाताओं को समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

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उल्लेखनीय है कि यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है। इसके तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि परियोजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और किसानों को स्थायी आय का आधार प्रदान करेगी। कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए “आने वाले समय का वरदान” बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर  आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में किया गया था। उन्होंने बताया कि यह परियोजना अगले 6 माह में पूर्ण की जाएगी और इसके संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी प्रारंभिक 5 वर्षों तक ठेकेदार द्वारा तथा उसके बाद जल उपभोक्ता समिति द्वारा संभाली जाएगी। इस समिति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) और IoT (Internet of Things) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल का नियंत्रित और वैज्ञानिक उपयोग संभव होगा। डेटा आधारित प्रबंधन के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कब और कितनी मात्रा में पानी देना है। इस योजना का उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। साथ ही उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जाएगा।

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