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CG : खेत की मेड़ बनी कमाई का जरिया : सतावर की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

By lokesh sharma|22 May 2026, 4:39 PM
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“खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना से छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला अतिरिक्त आमदनी का नया अवसर

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रायपुर, छत्तीसगढ़ में पारंपरिक कृषि के साथ-साथ किसानों को औषधीय खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की एक अभिनव पहल शुरू की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” नामक नवाचार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सतावर के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अपने खेतों की खाली पड़ी मेड़ और सुरक्षा बाड़ का उपयोग अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में कर सकें।

एक पौधा, दोहरे फायदे खेतों की सुरक्षा भी और बंपर कमाई भी

            सतावर एक कांटेदार लता प्रजाति का औषधीय पौधा है, जो किसानों को दोहरा लाभ पहुंचाता है। सतावर कांटेदार होने के कारण इसे खेत की मेड़ पर लगाने से मवेशियों और आवारा पशुओं से फसलों की चौतरफा सुरक्षा होती है। मेड़ की खाली जगह का कोई उपयोग नहीं होता था, वहां सतावर उगाकर किसान लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

औषधि उद्योगों में भारी मांग और औषधीय गुण

           सतावर के कंद में अद्भुत औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण आयुर्वेदिक और हर्बल दवा उद्योगों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने में, स्तनपान कराने वाली माताओं में दुग्धवर्धन के लिए, शरीर की सूजन, दर्द और मानसिक तनाव को कम करने में किया जाता है। 

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योजना की मुख्य विशेषताएं और सरकारी सहायता

        किसानों को बढ़ावा देने के लिए औषधि पादप बोर्ड द्वारा हर स्तर पर मदद दी जा रही है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सतावर के पौधे पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क पौधे) दिए जा रहे हैं, इसके लिए उन्हें केवल औषधि पादप बोर्ड से संपर्क करना होगा। पौधरोपण से लेकर फसल की कटाई और कंद तैयार होने तक की पूरी तकनीक का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा दिया जाएगा। किसानों को फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बोर्ड ने पहले से ही अनुबंधित क्रेताओं (अनुभवी खरीदारों) की व्यवस्था की है, जो सीधे किसानों से उपज खरीदेंगे। सतावर की फसल लगभग 16 महीने में तैयार हो जाती है। एक बार फसल तैयार होने के बाद यह कई वर्षों तक किसानों के लिए नियमित और सुनिश्चित आय का माध्यम बनी रहती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

         बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने इस योजना को किसानों के लिए “दुधारू गाय” के समान लाभकारी बताया है। वहीं बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला का कहना है कि यह योजना किसानों की सुनिश्चित आय की चिंता को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक खेती की लागत के बीच किसानों के लिए मुनाफे का एक नया और सुरक्षित रास्ता खोल रही है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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