छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ के अरक चावल को मिली नई पहचान, विधानसभा में दिखी स्थानीय स्वाद की झलक

By Admin|14 Jul 2026, 9:51 PM
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रायपुर,

अबूझमाड़ का स्वाद पहुँचा विधानसभा- अरक चावल की महक से

अरक (अथवा अरवा) चावल बिना उबाले (कच्चे) धान से तैयार किया गया चावल है। यह अपनी प्राकृतिक सुगंध, खिले हुए दानों और पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। पारंपरिक खेती के तरीकों से उगाए जाने वाले इन चावलों में एक खास सुगंध होती है जो पकने के दौरान पूरी रसोई को महका देती है।
             
नारायणपुर के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसी अबूझमाड़ की सदियों पुरानी पाक संस्कृति ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के गलियारों में अपनी अनूठी छाप छोड़ी। विधानसभा परिसर में आयोजित एक विशेष खाद्य प्रदर्शनी में जब जनप्रतिनिधियों के सामने अबूझमाड़ के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन परोसे गए, तो हर कोई इस समृद्ध विरासत का मुरीद हो गया। ​यह आयोजन केवल व्यंजनों का प्रदर्शन मात्र नहीं था, बल्कि नारायणपुर की जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कृषि उत्पादों और महिला सशक्तिकरण की एक शानदार सफलता की कहानी है।
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अरक चावल- प्रकृति की सुगंध और अनमोल विरासत
            
​इस विशेष आयोजन में सबसे बड़ा आकर्षण रहा अबूझमाड़ का पारंपरिक श्अरक चावलश्। हल्के पीले रंग और अपनी भीनी-भीनी प्राकृतिक खुशबू के लिए पहचाने जाने वाले इस चावल से बनी खीर ने विधानसभा में मौजूद सभी मंत्रियों, विधायकों और अतिथियों का दिल जीत लिया।
​इस खीर का स्वाद चखने के बाद जनप्रतिनिधियों ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे छत्तीसगढ़ की एक अनमोल और दुर्लभ खाद्य धरोहर बताया।

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 मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों से मिली नई पहचान
            
अबूझमाड़ के इन पारंपरिक स्वादों को सुदूर अंचलों से निकालकर राज्य के शीर्ष सदन तक पहुँचाने का यह सफर आसान नहीं था। इस पूरी पहल को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। ​वन मंत्री  केदार कश्यप और नारायणपुर कलेक्टर,जिनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी प्रयासों ने इस आयोजन को एक बड़े मंच पर स्थापित किया।

महिला आत्मनिर्भरता और संस्कृति का सशक्त संगम

​इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को तो प्रदर्शित किया ही, साथ ही स्थानीय महिलाओं के कौशल और आत्मनिर्भरता को भी एक नया आयाम दिया है। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने अपनी कड़ी मेहनत से साबित कर दिखाया कि यदि सही मंच मिले, तो वनांचल के पारंपरिक ज्ञान को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा सकता है। ​अबूझमाड़ की पाक परंपरा केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। विधानसभा में मिला यह सम्मान हमारे पारंपरिक कृषि उत्पादों और स्थानीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देगा।

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