कवर्धा जिलाछत्तीसगढ़

CG : किसानों को समर्थन मूल्य से किया जा रहा है वंचित: चोवाराम साहू …

By kadwaghut|18 Apr 2026, 3:46 PM
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कवर्धा । छत्तीसगढ़ साहू समाज के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष चोवाराम साहू ने कबीरधाम जिले में दलहनी-तिलहनी फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत 15 फरवरी 2026 से खरीफ एवं रबी दलहनी-तिलहनी फसलों की खरीदी शुरू करने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है।

उन्होंने बताया कि जिले के चारों विकासखंड- कवर्धा, पंडरिया, स. लोहारा और बोड़ला में करीब 66 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों को अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों जैसी अधिसूचित फसलों को समर्थन मूल्य पर बेचने की सुविधा मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्रों में खरीदी सुचारू रूप से नहीं हो रही है। चोवाराम साहू के अनुसार, किसानों को मजबूरी में अपनी उपज व्यापारियों को औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। रबी की प्रमुख फसल चना, जिसकी कटाई और मिसाई लगभग पूरी हो चुकी है, वर्तमान में मंडी में 5000 से 5300 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है, जबकि शासन द्वारा इसका समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारियों की सांठगांठ के चलते मंडी में कीमतें कृत्रिम रूप से नीचे रखी जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उपार्जन केंद्रों में किसानों को तरह-तरह के बहाने बनाकर लौटा दिया जा रहा है। कहीं सर्वर डाउन होने तो कहीं पोर्टल नहीं खुलने का हवाला दिया जा रहा है। हाल ही में किसानों द्वारा आवाज उठाए जाने पर जिले कुछ केन्द्रों में खरीदी शुरू की गई है लेकिन अधिकांश केन्द्रों में खरीदी अभी भी बंद है। किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष साहू ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों का समर्थन मूल्य और बाजार भाव दोनों ही किसानों के हित में नहीं हैं। चना सहित अन्य फसलों के दाम कई वर्षों से लगभग स्थिर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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उन्होंने बताया कि शासन द्वारा अरहर का 8000, मूंग का 8768, उड़द का 7800, मूंगफली का 7263, सोयाबीन का 5328, चना का 5875, मसूर का 7000 और सरसों का 6200 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है, लेकिन इन दरों पर खरीदी नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अंत में चोवाराम साहू ने शासन से मांग की है कि उपार्जन केंद्रों में तत्काल व्यवस्था सुधारते हुए पारदर्शी और नियमित खरीदी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को उनका वाजिब हक मिल सके और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

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