छत्तीसगढ़

कॉलेजों में शुरू होगी ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पढ़ाई, बाल सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार

By Admin|15 Apr 2026, 8:19 PM
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रायपुर. 
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राज्य में “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।

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इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

इसी क्रम में बुधवार को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप देने हेतु विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद आयोग के सचिव प्रतीक खरे और डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद ने अतिथियों का स्वागत किया।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हमारा प्रयास है कि इसे प्रभावी रूप से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाया जाए।”

बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों—पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी—के कुलपति, कुलसचिव, प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञ शामिल हुए।

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परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोग की सराहना की और इसके सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम जल्द ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

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