उत्तर प्रदेशराज्‍य

‘भरत नगर’ बना भदरसा, आस्था से जुड़े फैसले का श्रद्धालुओं ने किया स्वागत

By Admin|14 Jul 2026, 12:12 PM
f X W

भदरसा का नाम 'भरत नगर' होने से श्रद्धालु गदगद आस्था को मिला सम्मान

Advertisement
Advertisement

मुख्यमंत्री योगी ने वापस दिलाई भरत जी की तपोभूमि की ऐतिहासिक पहचान 

सदियों से श्रद्धालु इस क्षेत्र को भरत जी की तपोभूमि के रूप में पूजते आ रहे हैं 
 
अयोध्या की सनातन विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

लखनऊ 
 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या जिले के भदरसा कस्बे का नाम बदलकर 'भरत नगर' कर दिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद से श्रद्धालुओं में उत्साह है। उनकी सनातन आस्था को सम्मान मिलने से गदगद हैं। भदरसा का संबंध सीधे भगवान श्रीराम के अनुज भरत की तपोभूमि नंदीग्राम (वर्तमान भरत कुंड) से माना जाता है और इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है।

भरत जी ने नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीते हुए 14 वर्षों तक संभाली अयोध्या की बागडोर

जब भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास पर गए, तब उनके अनुज भरत ने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने चित्रकूट जाकर श्रीराम से वापस लौटने का आग्रह किया, लेकिन प्रभु श्रीराम ने पितृ आज्ञा के कारण लौटने से मना कर दिया। तब भरत जी उनकी चरण-पादुका (खड़ाऊं) लेकर वापस लौट आए थे और अयोध्या की राजसी सुविधाओं से दूर नंदीग्राम में एक कुटिया बना ली थी। 

भरत जी ने भगवान राम की खड़ाऊं को राजसिंहासन पर स्थापित किया और स्वयं 14 वर्षों तक तपस्वी जीवन जीते हुए वहीं से राज्य का संचालन किया। यही स्थान आज भरत कुंड के नाम से प्रसिद्ध है और भरत नगर इसी पवित्र क्षेत्र के निकट स्थित है। सदियों से श्रद्धालु इस पूरे क्षेत्र को भरत जी की तपोभूमि के रूप में पूजते आ रहे हैं।

READ ALSO  17 सितंबर से यूपी में ‘सेवा संकल्प’ अभियान, सीएम योगी बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक ताकत बना

भाषाई बदलावों के कारण 'भदरसा' नाम प्रचलन में आने की है मान्यता

स्थानीय परंपराओं और भाषाई मान्यताओं के अनुसार, 'भदरसा' कोई मूल नाम नहीं था, बल्कि यह समय के साथ बदला हुआ रूप माना जाता है। कहा जाता है कि रामायण काल में यह क्षेत्र भरत जी की तपोभूमि का हिस्सा था। लोक मान्यता है कि उस समय इस स्थान को 'भरत-दशा', 'भरत-वास' अथवा 'भरत-स्थान' जैसे नामों से जाना जाता था। समय के साथ स्थानीय बोलचाल और भाषाई परिवर्तनों के कारण 'भरत' शब्द 'भदर' तथा 'दशा' या 'वास' का रूप बदलकर 'सा' हो गया, जिससे यह नाम 'भदरसा' के रूप में प्रचलित हो गया।

ओझल होने लगा था भरत जी से सीधा भाषाई संबंध, मुख्यमंत्री ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

जानकारी के अनुसार, मध्यकाल और नवाबी शासन के दौरान कई प्राचीन स्थानों के नाम प्रशासनिक अभिलेखों में बदल गए या उनके मूल स्वरूप से अलग रूप प्रचलन में आ गए। इसी काल में 'भदरसा' नाम सरकारी दस्तावेजों में स्थापित हो गया, जिससे इसका मूल सनातन इतिहास और भरत जी से सीधा भाषाई संबंध ओझल सा होने लगा था। इसके धार्मिक और सनातन महत्व को देखते हुए जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदरसा का नाम भरत नगर करने का ऐतिहासिक निर्णय ले लिया। 

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया नाम परिवर्तन

योगी सरकार लगातार उन स्थलों की पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिनका संबंध भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से रहा है। इसी क्रम में 'भदरसा' का 'भरत नगर' नाम परिवर्तन करने का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की पौराणिक और धार्मिक पहचान को और अधिक मजबूत करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस जगह को सीधे भरत जी के त्याग, भाईचारे और मर्यादा की मिसाल के रूप में याद रख सकें। सरकार द्वारा अब इस पूरे 'भरत नगर' और 'भरत कुंड' क्षेत्र को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

READ ALSO  खनिज संसाधनों के सदुपयोग से प्रदेश के विकास को मिलेगी रफ्तार, सिंगरौली को मॉडल माइनिंग डिस्ट्रिक्ट बनाने का लक्ष्य
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins