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CG : एशियाई खेलों के चयन पर नजर, तीरंदाज कोमालिका बारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में दमदार प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त …

By lokesh sharma|30 Mar 2026, 1:25 PM
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रायपुर। साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं। हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।

अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं। कोमालिका ने साई मीडिया कहा, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।” झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे जोड़ा, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।”

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वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।

प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था। वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।” उन्होंने आगे जेड़ा, “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”

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24 वर्षीय कोमालिका रायपुल में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगी। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वह कहती हैं, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।”

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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