कवर्धा जिलाछत्तीसगढ़

CG : महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का विरोध, महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय : भावना बोहरा …

By kadwaghut|18 Apr 2026, 3:19 PM
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कवर्धा । प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। इस अधिनियम को पारित होने से रोकने के लिए कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी द्वारा एकजुट होकर महिलाओं के लिए लाये गए इस अधिकार का विरोध करते हुए लोकसभा सदन में उसे पारित होने से रोक दिया गया।

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विपक्षी पार्टियों द्वारा किये गए इस कृत्य पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व और निति निर्माण की दिशा में विशेष स्थान देने के लिए प्रधानमन्त्री मोदी और गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने हेतु 16 से 18 अप्रैल तक लोकसभा में विशेष सत्र बुलाया गया है लेकिन, विपक्षी पार्टियों द्वारा लोकसभा में जो किया गया, वह भारत की प्रत्येक महिला के सम्मान और अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को 33% आरक्षण देने का ऐतिहासिक अवसर विपक्ष ने एक बार फिर अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुर्बान कर दिया। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने मिलकर महिलाओं के सशक्तिकरण की इस पहल को रोकने का जो निंदनीय काम किया वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। चुनाव के दौरान लड़की हूँ लड़ सकती हूँ का नारा देने वाली कांग्रेस पार्टी और उनके साथ अन्य विपक्षी पार्टियों ने इस अधिनियम में बाधा लाने का जो कार्य किया है उससे स्पष्ट है कि उनके लिए महिलाएं केवल एक वोट बैंक हैं, लेकिन मैं कहना चाहती हूँ कि महिलाएं केवल वोट बैंक नहीं हैं, वे इस देश की शक्ति हैं, भविष्य हैं। उनके अधिकारों को बार-बार कुचलने की यह मानसिकता देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।

न्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के सुरक्षा, सम्मान, सहभागिता और उनके स्वाभिमान को अपनी नीतियों के केंद्र में रखकर उन्हें प्रतिनिधित्व का अवसर देने का सार्थक प्रयास किया,लेकिन विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को दरकिनार करने का जो कृत्य किया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं स्पष्ट कहना चाहती हूं नारी शक्ति का यह अपमान अब हर गांव, हर शहर और हर मंच पर गूंजेगा। देश की माताएं-बहनें इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देंगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन विधेयक को कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी द्वारा बाधित करना लोकतंत्र की भावना और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है। यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के वर्षों पुराने संघर्ष, उनके सपनों और उनके समान भागीदारी के अधिकार का प्रतीक है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को नीति निर्माण, नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होना था। लेकिन विपक्ष ने अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस ऐतिहासिक अवसर को कुचलने का कार्य किया है। यह केवल विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, उनके नेतृत्व और उनकी क्षमता पर अविश्वास को दर्शाता है।

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भावना बोहरा ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। उज्ज्वला योजना, आवास और शौचालय, नमो ड्रोन और लखपति दीदी, मातृत्व लाभ, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला सुरक्षा से जुड़े सख्त कानून, तीन तलाक जैसे कानून को समाप्त करना और अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में यह विधेयक प्रधानमंत्री और केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक भूमिका में स्थापित करने के लिए हैं। लेकिन विपक्ष ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि उन्हें महिलाओं के सशक्तिकरण से अधिक अपने राजनीतिक समीकरणों की चिंता है। महिलाएं केवल मतदाता नहीं हैं, वे इस राष्ट्र की आत्मा हैं। परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अतुलनीय है। ऐसे में उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना या उनके अधिकारों को टालना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं कहा जा सकता। यह विधेयक महिलाओं को उनका वैधानिक और नैतिक अधिकार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था, जिसे विपक्ष ने रोककर महिलाओं के विश्वास को आहत किया है।

एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते यह विषय मेरे लिए अत्यंत संवेदनशील और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। आज देश की हर महिला यह देख रही है कि कौन उनके अधिकारों के साथ खड़ा है और कौन उन्हें रोकने का प्रयास कर रहा है। नारी शक्ति का यह अपमान अब केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर गांव, हर शहर और हर घर में इसकी चर्चा होगी। देश की माताएं-बहनें इस अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देंगी। आने वाले समय में यह आक्रोश जन-जन की आवाज बनेगा और हर स्तर पर इसका प्रभाव दिखाई देगा। विपक्ष को यह समझना होगा कि अब देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानती हैं। आने वाले समय में महिलाएं इन महिला विरोधी विपक्षियों को को कड़ा जवाब जरुर देंगी।

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भावना बोहरा ने कहा कि आज विपक्षी दलों की राजनीति जनहित से भटककर केवल विरोध और निजी स्वार्थों तक सीमित हो गई है। देशहित के हर बड़े और ऐतिहासिक निर्णय पर इनका रुख नकारात्मक रहा है, चाहे जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का साहसिक कदम हो, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण, हमारे वीर जवानों द्वारा की गई सर्जिकल और एयर स्ट्राइक, मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने वाला तीन तलाक कानून, या फिर देश को सशक्त और संगठित बनाने की दिशा में वन नेशन, वन इलेक्शन जैसी पहल और ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील एवं राष्ट्रीय गौरव से जुड़े हर मुद्दे पर विपक्ष ने केवल विरोध की राजनीति की है। यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए राष्ट्रहित से बढ़कर राजनीतिक लाभ और सत्ता की लालसा है।लोकसभा में महिलाओं के अधिकार के लिए नारी शक्ति वंदन बिल पर विरोध दर्ज कराना दर्शाता है कि विपक्ष अब सकारात्मक सुझाव देने के बजाय हर निर्णय में बाधा डालने की मानसिकता से ग्रसित हो चुका है। देश की जनता अब यह समझ चुकी है कि विकास के मार्ग में कौन साथ है और कौन केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहें हैं।

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