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बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुना, सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले सीएम, कल शपथ ग्रहण होगा

By Admin|14 Apr 2026, 5:07 PM
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पटना
बिहार की राजनीति के लिए 14 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है. करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के बाद  सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है. शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होने जा रहा है. राजनीति के जानकारों की नजर में भाजपा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बिहार में लंबे समय बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होगी. स्पष्ट है कि इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच बिहार की बदलती सियासी तस्वीर में सम्राट चौधरी एक बेहद अहम चेहरा बनकर उभरे हैं। 

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सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे. उन्हें ​बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है. पटना में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुई बीजेपी विधानमंडल की बैठक में विजय सिन्हा, मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल ने भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा. सम्राट चौधरी थोड़ी देर में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। 

बिहार में अब नई सरकार काम करेगी- नीतीश कुमार
उन्होंने आगे कहा, 'इन दिनों काम को और आगे बढ़ाया गया है. अगले पांच वर्षों यानि 2025 से 2030 के लिए 7 निश्चय-3 का गठन किया गया है. इससे और ज्यादा काम होगा जिससे बिहार काफी आगे बढ़ेगा. बिहार के विकास में केन्द्र का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नमन करते हैं. बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के टॉप राज्यों में शामिल हो जाएगा तथा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा. हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया है. इतने दिनों से हमने लगातार लोगों की सेवा की है. हमने तय किया था कि अब मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और इसलिए आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद माननीय राज्यपाल से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. अब नई सरकार यहां का काम देखेगी. नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा. आगे भी बहुत अच्छा काम होगा तथा बिहार बहुत आगे बढ़ेगा. सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं तथा शुभकामनाएं देता हूं। 

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हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया- नीतीश कुमार
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ बिहार में एक राजनीतिक युग का अंत हो गया है. उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं. इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने X पर एक पोस्ट में अपने कार्यकाल की उप​लब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने लिखा, 'आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी. तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं. सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो, महादलित हो- सभी के लिए काम किया गया है. हर क्षेत्र में काम हुआ है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो. महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है। 

बता दें कि कभी राजद और जदयू के सिपाही रहे सम्राट आज भाजपा के उस ‘किंग’ की भूमिका में नजर आएंगे, जिन्होंने नीतीश कुमार के साथ सत्ता की साझेदारी में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। 

विरासत और शुरुआती संघर्ष
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई. परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में स्थापित कर दिया।

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राजनीतिक करियर की मुख्य उपलब्धियां

    19 मई 1999: बिहार सरकार में कृषि मंत्री के पद की शपथ ली.
    2000-2010: परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव लड़ा और जीता.
    2010: बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाए गए.
    2 जून 2014: शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली.

बदलता राजनीतिक पाला और भाजपा में उदय
इसके बाद सम्राट चौधरी ने भाजपा का रास्ता चुना. राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ. वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया. उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई. 2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इस बात का संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है. फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया. इसके बाद दुबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। 

मुरैठा (पगड़ी) की प्रतिज्ञा
बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में वह नीतीश कुमार के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे. हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही डिप्टी सीएम की भूमिका निभाते रहे हैं.सम्राट चौधीरी ने जब नीतीश कुमार को हटाने का संकल्प लिया था और मुरेठा नहीं उतारने का वचन लिया था तो वह काफी चर्चा में रहे थे। 

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मौजूदा दौर की राजनीति में क्यों हैं खास?
बता दें कि सम्राट चौधरी लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के ‘कुश’ समुदाय से आते हैं. भाजपा उनके जरिए बिहार के एक बड़े पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है. वे विपक्ष और सहयोगियों, दोनों के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं। 

सत्ता में दोहरा कार्यकाल
यहां यह भी बता दें कि पहली बार जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर 2025 को दोबारा डिप्टी सीएम बने थे. भाजपा की राजनीति की दृष्टि से देखिये तो यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर और बिहार सरकार में उनका कद लगातार बढ़ता रहा है. आज जब बिहार की ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव की चर्चा है, सम्राट चौधरी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. जानकार कहते हैं कि सम्राट चौधरी न केवल सरकार का हिस्सा हैं, बल्कि संगठन और सत्ता के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं. आगामी चुनावों में बिहार भाजपा का भविष्य काफी हद तक सम्राट चौधरी के नेतृत्व और उनकी रणनीति पर टिका होगा। 

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