छत्तीसगढ़

माओवादियों के गढ़ कुमनार में पुलिस ने लगाया अंतिम सुरक्षा कैंप, क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा

By Admin|24 Mar 2026, 9:04 AM
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नारायणपुर
नारायणपुर पुलिस ने दशकों से माओवादियों का 'सेफजोन' माने जाने वाले दुर्गम क्षेत्र कुमनार में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 'माड़ बचाओ' अभियान के तहत स्थापित यह कैंप वर्ष 2026 का आठवां और क्षेत्र का अंतिम सामरिक पड़ाव है, जिससे अब अबूझमाड़ का सीधा संपर्क बीजापुर के भैरमगढ़ से जुड़ गया है।

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माओवादी साम्राज्य का अंत और विकास की नई राह
कुमनार वही क्षेत्र है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी का अघोषित शासन चलता था और जहां कुख्यात नक्सली बसवा राजू को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी (38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं वाहिनी) के संयुक्त प्रयासों से अब यहां तिरंगा निर्भीक होकर लहराएगा।

ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी
इस कैंप की स्थापना से ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ के बीच डायरेक्ट रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित हुई है। इससे पूर्व, वर्ष 2025 तक ओरछा के भीतर का हिस्सा नक्सलियों के नियंत्रण में था, लेकिन अब यहां विकास की मुख्यधारा पहुंच चुकी है।

96 किलोमीटर दूर बीहड़ इलाके में मजबूत कदम
नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 96 किलोमीटर दूर ओरछा क्षेत्र के सबसे दुर्गम और बीहड़ इलाकों में शामिल दिवालुर अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है. यह वही इलाका है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी के नेता रणनीतियां बनाते थे. कुख्यात नक्सली बसवा राजू जैसे आतंकियों की मौत का गवाह रहा यह क्षेत्र लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहा, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पुलिस कैंप की स्थापना माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

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‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को स्थापना
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को इस नए कैंप की स्थापना की गई. इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में नारायणपुर पुलिस के साथ डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की छह अलग-अलग वाहिनियां 38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं बटालियन शामिल रहीं. जवानों को घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और कठिन रास्तों से गुजरते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ी, लेकिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.

सड़क कनेक्टिविटी से खुले विकास के रास्ते
दिवालुर में कैंप खुलने से कांदुलनार-ओरछा से दिवालुर और कुमनार तक की महत्वपूर्ण सड़क कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है. यह इलाका दशकों से अलग-थलग पड़ा था, जहां न तो पक्की सड़कें थीं और न ही प्रशासन की नियमित पहुंच. अब रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट और लेकवाडा जैसे गांवों तक मोबाइल नेटवर्क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने का रास्ता खुलेगा. स्थानीय लोगों के लिए यह कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है.

मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं
जिला मुख्यालय से 102 किमी दूर स्थित इस कैंप के माध्यम से आसपास के आधा दर्जन गांवों (लेकवाडा, नेडअट्टे, डोडूम आदि) में सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण में तेजी आएगी। शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सुगम होगी। नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिलेगी।

वरिष्ठ अधिकारियों का नेतृत्व
बस्तर आईजी पी. सुन्दराज और नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य 'शांतिपूर्ण एवं समृद्ध नारायणपुर' बनाना है, जहां दशकों से अलग-थलग पड़े ग्रामीणों को लोकतंत्र की बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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बसवा राजू सहित कई माओवादियों का हुआ था एनकाउंटर

नारायणपुर जिले के थाना ओरछा क्षेत्र में दिवालूर गांव है. यहां 16 मार्च 2026 को नया कैंप स्थापित किया गया है. यही वह इलाका है, जहां सुरक्षा बलों ने कुख्यात माओवादी नेता बसवा राजू सहित कई बड़े माओवादियों को मार गिराया था. यह माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब यहां कैंप खुलने से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि दशकों से उपेक्षित इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी.
माड़ बचाओ अभियान

नारायणपुर पुलिस ने ''माड़ बचाओ अभियान'' के तहत यह कैंप स्थापित किया है. इस कैंप का उद्देश्य नक्सल प्रभाव को समाप्त कर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ना है. नारायणपुर जिले में माड़ बचाओ अभियान के तहत लगातार नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. इसके जरिए अंदरूनी गांवों तक सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.
कैंप खुलने से फायदा

पुलिस अधिकारी ने बताया कि नए कैंप के शुरू होने से दिवालूर के साथ ही आसपास के गांवों रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट, लेकवाड़ा, नेडअट्टे में विकास की गति तेज होगी. अब इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा. कुमनार से सोनपुर होते हुए भैरमगढ़ (जिला बीजापुर) तक सड़क संपर्क स्थापित होने से लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी. यह कनेक्टिविटी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि प्रशासनिक पहुंच भी आसान बनाएगी.

संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप से सुरक्षा नेटवर्क मजबूत

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नारायणपुर पुलिस ने साल 2025 में कुतुल सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में नए कैंप स्थापित किए थे. साल 2026 में जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर और अब दिवालूर में कैंप स्थापित कर सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत किया गया है.
साल 2026 में अबूझमाड़ में खुले कैंप

    जटवर
    वाड़ापेंदा
    कुरसकोड़ो
    हच्चेकोटी
    आदनार
    बोटेर
    दिवालूर

साल 2025 में अबूझमाड़ में खुले कैंप

कुतुल

कोडलियार

बेड़माकोटी

पदमकोट

कंडुलपार

नेलांगुर

पांगुड़

रायनार

एडजूम

ईदवाया

आदेर

कुडमेल

कोंगे

सितरम

तोके

जाटलूर

धोबे

डोडीमरका

पदमेटा

लंका

परियादी

काकुर

बालेबेड़ा

कोडेनार

कोडनार

आदिनपार

मन्दोड़ा
अबूझमाड़ के विकास पर फोकस

दिवालूर में नया सुरक्षा कैंप स्थापित होना न केवल नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह अबूझमाड़ के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है. 

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