छत्तीसगढ़

चर्रा की योगेश्वरी देवांगन की सफलता कहानी, आजीविका मिशन से मिला महिला सशक्तिकरण का रास्ता

By Admin|13 Mar 2026, 4:52 PM
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धमतरी : आजीविका मिशन से बदली तस्वीर: चर्रा की योगेश्वरी देवांगन बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा

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मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया 

धमतरी

दीनदयाल अन्त्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। परिणामस्वरूप कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी धमतरी जिले के विकासखंड कुरूद के ग्राम चर्रा की श्रीमती योगेश्वरी देवांगन की है, जो आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर पाईं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
  योगेश्वरी देवांगन जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। आजीविका मिशन के तहत कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में योगेश्वरी देवांगन, अध्यक्ष जय माँ परमेश्वरी स्वयं सहायता समूह ग्राम चर्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित छठवें जेण्डर संवाद के लिए किया गया था ।इस संवाद में वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लैंगिक निवेश क्यों आवश्यक है” विषय पर अपने अनुभव साझा किए ।
  योगेश्वरी देवांगन बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार की आजीविका कृषि और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और जीवन दोनों में बड़ा बदलाव आया।
  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने बैंक से ऋण प्राप्त किया तथा पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र और आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की स्थापना की। शुरुआत में सामाजिक दबाव और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
  आज योगेश्वरी देवांगन का मुर्गी फार्म सफल उद्यम बन चुका है। उनके फार्म में तैयार होने वाली मुर्गियां और चूजे देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। उनके  फ़ार्म में करीब 7 मुर्गी की नस्लें, बटेर, बत्तख, गिनी फाउल, टर्की  है । अंडों से बच्चे निकालने की मशीन है।  उन्होंने  बताया कि शुरू में मालूम नहीं था कहा किस बाजार में बेचना है । उन्होंने मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया है । देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से वे अन्य ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
   योगेश्वरी देवांगन का सपना है कि उनके समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं। इसी उद्देश्य से वे समूह की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही भविष्य में वे खरगोश पालन जैसे नए उद्यम की भी शुरुआत करने की योजना बना रही हैं।
   योगेश्वरी देवांगन की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रख सकती हैं। आज वे अपने गांव और जिले की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और संघर्ष से सफलता पाने की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।

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