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ओंकारेश्वर को ममलेश्वर से जोड़ने वाला झूला पुल बंद, तार टूटने से रोकी गई आवाजाही

By Admin|24 Jun 2026, 5:06 PM
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 ओंकारेश्वर
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर को ममलेश्वर से जोड़ने वाले प्रमुख झूला पुल की लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने से मंगलवार देर रात पुल से आवाजाही को बंद कर दिया गया है। बुधवार सुबह प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर ताला लगा दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर को जोड़ने वाले इस पुल की कड़ी टूटने से पुल की अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी नजर आ रहा है। इससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है। इसी के मद्देनजर पुल को आवाजाही के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है।

नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है और तकनीकी जांच के बाद ही पुल को दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता है।

रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी महाशिवरात्रि से पहले पुल में तकनीकी खराबी सामने आई थी। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में दूसरी बार खराबी आने से इसके रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पांच दिन पहले इसी पुल से गुजरी थीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
विदित हो कि पांच दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इसी झूला पुल से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने के लिए गुजरी थीं। गनीमत रही कि उस दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई। उनके दौरे के बाद यह घटना सामने आई है।

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रखरखाव में लापरवाही या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की एक कड़ी टूटने के बाद अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पुल का एक हिस्सा हल्का झुक भी गया है। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में वर्ष 2023 के बाद दूसरी बार तकनीकी खराबी सामने आई है। इसके बावजूद समय पर व्यापक मरम्मत और सुरक्षा ऑडिट नहीं होना चिंता का विषय है। तीन वर्ष पूर्व महाशिवरात्रि पर पुल की केबल टूटने से करीब दो माह तक आवाजाही बंद रही थी। तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पुल पर भार कम करने के लिए इसके उपर लगा टीन का शेड हटवा दिया था।

हैंडओवर पर एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच खींचतान
सूत्रों के अनुसार लंबे समय से झूला पुल को नगर परिषद को हैंडओवर करने का मामला लंबित है। एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से रखरखाव प्रभावित होने की बात भी सामने आती रही है। सवाल यह है कि आखिर पुल की नियमित निगरानी और मरम्मत की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है। जब तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। फिलहाल एनएचडीसी ही इसका रखरखाव कर रही है।

बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा इंतजाम कमजोर
ओंकारेश्वर में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के चलते आने वाले समय में यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में झूला पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित तकनीकी जांच,लोड क्षमता का परीक्षण और वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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सिंहस्थ पर फोकस, लेकिन स्थानीय व्यवस्थाएं उपेक्षित
प्रशासन का पूरा ध्यान सिंहस्थ की तैयारियों पर केंद्रित है, लेकिन स्थानीय बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी अब सामने आने लगी है। नर्मदा पर बना यह झूला पुल तीर्थयात्रियों की जीवनरेखा हैए इसलिए इसके रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत
स्थानीय लोगों का मानना है कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन और ओंकारेश्वर जैसी संवेदनशील धार्मिक नगरी के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल प्रोबेशनरी आइएएस अधिकारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यहां अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती समय की आवश्यकता है। पिछले करीब चार साल से पुनासा एसडीएम के पद पर प्रशिक्षु आइएएस की लर्निंग स्कूल बना हुआ है। यहां के एसडीएम के पास ही ओंकारेश्वर जैसी महत्वपूर्ण जगह का प्रभार भी रहता है।

इधर ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट में लंबे समय से रिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ;सीईओद्ध के पद पर भी योग्य और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति शीघ्र की जानी चाहिएए ताकि विकास कार्यों, सुरक्षा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बेहतर समन्वय हो सके।

नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि पुल की मरम्मत शुरू कर दी गई है और तकनीकी परीक्षण के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता हैए लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते स्थायी और जिम्मेदार समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुनासा एसडीएम पकंज वर्मा से वस्तु स्थिति जाने के लिए फोन लगाने पर चर्चा नहीं हो सकी

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