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‘नया-नया मुख्यमंत्री बनल हैं…’, राबड़ी देवी के बयान से बिहार की राजनीति गरमाई

By Admin|30 May 2026, 10:01 PM
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पटना 

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बिहार में 10 सर्कुलर रोड सरकारी बंगले की लड़ाई में सरकार और विधान परिषद में नेता विरोधि दल राबड़ी देवी के बीच ठन गई है। पूर्व सीएम ने वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुली चुनौती दी है कि बंगला खाली नहीं करेंगी, सरकार फोर्स भेजकर खाली करवा ले। शुक्रवार को भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी सरकारी आवास खाली करने का फाइनल नोटिस भेजा। राबड़ी देवी जिस आवास में 2005 से रह रही हैं वह पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। सरकार की नई चिट्ठी पर सियायी बवाल मच गया है। अपनी नेता रबड़ी देवी के समर्थन में राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) ने मोर्चा खोल दिया है।

 बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी ने अपने आधिकारिक आवास ’10 सर्कुलर रोड’ को खाली करने के सरकारी आदेश पर बेहद कड़ा और बागी रुख अपना लिया है. राबड़ी देवी ने पटना में मीडिया से बात करते हुए साफ तौर पर एलान कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपना यह मौजूदा बंगला खाली नहीं करेंगी. उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार चाहे तो पुलिस बल का प्रयोग कर सकती है. पूर्व मुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के बाद बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। 

“नया-नया मुख्यमंत्री बने हैं सम्राट चौधरी”
राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा और तीखा तंज कसते हुए उनकी प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “मैं किसी कीमत पर यह आवास खाली नहीं करूंगी. सम्राट चौधरी फोर्स बुलवा कर आवास खाली करवाएं. वह अभी नए-नए मुख्यमंत्री बने हैं.”आरजेडी खेमे का तर्क है कि 10 सर्कुलर रोड का यह बंगला केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री का आवास नहीं है, बल्कि यह पिछले दो दशकों से बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति का मुख्य केंद्र और लालू-राबड़ी परिवार की पहचान रहा है. ऐसे में इसे खाली कराने के नोटिस को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई के रूप में देख रहा है। 

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क्या कहता है सरकारी नियम और आगे की राह?
भवन निर्माण विभाग के नियमों के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन और नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के आवासों का नए सिरे से आवंटन (Re-allotment) किया जाता है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के नए मंत्रियों को जगह देने के लिए कई पुराने बंगलों को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। 

क्या मुद्दा खोज रहा लालू परिवार?
हालांकि, राबड़ी देवी द्वारा खुलेआम फोर्स बुलाकर बंगला खाली कराने की चुनौती दिए जाने के बाद अब गेंद पूरी तरह से राज्य प्रशासन और मुख्यमंत्री के पाले में है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि सरकार बलपूर्वक इस बंगले को खाली कराने का प्रयास करती है तो आरजेडी इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर सड़कों पर उतर सकती है, जिससे सूबे की कानून-व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहेगा। 

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