मध्य प्रदेश

दिव्यांग बच्चों के परिवार से जुड़ाव के लिए जागरूकता अभियान की आवश्यकता, मंत्री सुश्री भूरिया का अहम बयान

By Admin|17 Mar 2026, 5:06 PM
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दिव्यांग बच्चों को परिवार से जोड़ने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता: मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया

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क्षेत्रीय परामर्श बैठक में दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने, राज्यों के समन्वय और विशेष बच्चों के पुनर्वास पर हुआ मंथन

भोपाल 
दिव्यांग बच्चों को संस्थाओं से निकालकर परिवार का स्नेह और सुरक्षित भविष्य दिलाने के उद्देश्य से आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक मंगलवार को रवीन्द्र भवन में हुई। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज की संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच से ही इन बच्चों को परिवार और बेहतर जीवन मिल सकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “दिव्यांग” शब्द देकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में गैर-संस्थागत पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है और मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से स्पॉन्सरशिप तथा ऑफ्टर-केयर की व्यवस्था कर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

भोपाल में आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक में सचिव महिला बाल विकास श्रीमती जी वी रश्मि , केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) की उप निदेशक श्रीमति ऋचा ओझा , उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए परिवार का स्नेह अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कोई भी संस्था परिवार का स्थान नहीं ले सकती। सुश्री भूरिया ने कहा कि वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश में 4,155 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें केवल 7 प्रतिशत विशेष आवश्यकता वाले बच्चे थे और इनमें से भी अधिकांश बच्चों को विदेशी दम्पत्तियों ने अपनाया। यह स्थिति बताती है कि देश में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आईवीएफ जैसी तकनीक का प्रचार हो रहा है वैसा ही प्रभावी प्रचार दत्तक ग्रहण के लिये होना चाहिए। इसके लिये फोकस्ड एप्रोच के साथ नि:संतान दम्पतियों को परामर्श देना आवश्यक है। हमारे देश में ऐसे अनेक उदाहरण दिव्यांग बच्चे हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र चाहे वह खेल का मैदान हो, यूपीएससी में सफलता हासिल करना हो। सभी में अपना परचम लहराया है। सुश्री भूरिया ने सुझाव दिया कि सफल दिव्यांग व्यक्तियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर समाज में सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है।

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मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को गोद लेने वाले परिवारों के लिए चिकित्सा उपचार, निःशुल्क फिजियोथेरेपी, परामर्श सेवाएं, शिक्षा सहायता और बीमा जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की संख्या कम होने के कारण राज्यवार विशेष योजनाऐं बनाकर उनके समुचित पुनर्वास के लिए बजट का प्रावधान किया जा सकता है।

समाज की संवेदनशीलता से ही बदल सकता है दिव्यांग बच्चों का भविष्य – श्रीमती रश्मि

महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी. वी. रश्मि ने कहा कि भारतीय समाज में संस्कारों का अत्यधिक महत्व है, लेकिन जब बात विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने की आती है तो सामाजिक रूढ़ियां अक्सर निर्णय में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि समाज की संवेदनशीलता से ही बदल सकता है दिव्यांग बच्चों का भविष्य। सचिव श्रीमती रश्मि ने विश्वास जताया कि यह बैठक सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य और विधि जैसे विभिन्न विभागों के समन्वय से बेहतर समाधान खोजने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहभागी राज्यों से अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचार और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करने का आग्रह किया।

दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार आधारित पुनर्वास पर जोर

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की उप निदेशक श्रीमती ऋचा ओझा ने कहा कि देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य विशेष बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में दत्तक ग्रहण का प्रतिशत अभी भी कम है, जिसे जागरूकता और नीति सुधारों के माध्यम से बढ़ाने की आवश्यकता है। श्रीमती ओझा ने बताया कि इस बैठक में 4 राज्यों के प्रतिनिधि दत्तक ग्रहण नीति से जुड़े मुद्दों, नवाचारों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं। श्रीमती ओझा ने कहा कि बैठक का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार आधारित पुनर्वास पर जोर देना है ।

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बैठक में राज्यों में दिव्यांग बच्चों के दत्तक गृहण को वर्तमान स्थिति की समीक्षा, चिकित्सीय आंकलन और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श तथा बाल संरक्षण और स्वास्थ्य तंत्र के बीच बेहतर समन्वय के उपायों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में बालिका गृह भोपाल की बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जवाहर बाल भवन के बच्चों ने नृत्य-नाटिका से संदेश दिया कि दत्तक ग्रहण बच्चों के जीवन को नया भविष्य और नया परिवार दे सकता है।

 

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