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योगी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण मानकों में सुधार

By Admin|01 Jun 2026, 1:02 PM
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एनएफएचएस-6 की ताजा रिपोर्ट में यूपी की बड़ी छलांग: 8 साल में बदली सामाजिक विकास की तस्वीर

बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

योगी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण मानकों में सुधार

परिवार नियोजन अभियान रहा सफल, प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 हुई

संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंची

स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंचा

लखनऊ
 राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। वर्ष 2015-16 और 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना बताती है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन, महिला कल्याण कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास का असर अब राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में भी दिखाई देने लगा है।

सबसे पहले यदि बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2015-16 में जहां केवल 71 प्रतिशत घरों तक बिजली की पहुंच थी, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार स्वास्थ्य बीमा या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत पहुंच गया है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी पहलों ने लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच उपलब्ध कराया है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी 96.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97.9 प्रतिशत (ग्रामीण) पहुंच गई है, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है।

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जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2015-16 के 2.74 से घटकर 2023-24 में 2.2 रह गई है। यह आंकड़ा जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। परिवार नियोजन के किसी भी साधन का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं ऐसी महिलाएं जो बच्चों के जन्म में अंतर तो रखना चाहती थीं परंतु परिवार नियोजक साधनों का उपयोग नहीं कर पा रहीं थीं, उनकी संख्या में भी काफी गिरावट आई है। यह 18 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों में मां बनने अथवा गर्भवती होने का प्रतिशत 4 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत हो गया है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सरकारी अस्पतालों के विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2015-16 में केवल 26.4 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच कराती थीं, जबकि अब गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70.6 तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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टीकाकरण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मिशन इंद्रधनुष और नियमित टीकाकरण अभियानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में गंभीर बीमारियों का खतरा कम हुआ है और बाल स्वास्थ्य में सुधार आया है।

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बच्चों में बौनापन यानी उम्र के अनुसार कम ऊंचाई की समस्या 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। इसी प्रकार कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत रह गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, पोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है।

महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर सर्वेक्षण ने सबसे सकारात्मक तस्वीर पेश की है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। वहीं वित्तीय आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंच गया है। जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों और मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में भी सुधार दर्ज हुआ है। पति द्वारा शारीरिक अथवा यौन हिंसा का सामना करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव महिलाओं में बढ़ती जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और सरकारी सहायता तंत्र की मजबूती का परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश के विकास की यह तस्वीर आने वाले वर्षों में और बेहतर होने की उम्मीद जगाती है।

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