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CG : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बेटे को घर से बेदखल कर सकता है ट्रिब्यूनल…

By kadwaghut|19 Jul 2026, 12:00 PM
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बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत गठित मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल (अतिरिक्त कलेक्टर) को जरूरत पड़ने पर बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए उनके ही घर से बेटे या अन्य रिश्तेदार को बेदखल करने का अधिकार है।

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जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने रायगढ़ निवासी रामदयाल साहू की याचिका खारिज करते हुए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराया। मामला रामदयाल की मां हेमकुंवर के नाम आवंटित प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान से जुड़ा था, जिस पर बेटे का कब्जा पाया गया था। ट्रिब्यूनल ने 2021 और फिर 2024 में मकान का कब्जा बुजुर्ग मां को वापस दिलाने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि संपत्ति पैतृक है और स्वामित्व विवाद सिविल कोर्ट में लंबित है, इसलिए ट्रिब्यूनल को बेदखली का अधिकार नहीं है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक कानून का उद्देश्य संपत्ति का स्वामित्व तय करना नहीं, बल्कि बुजुर्गों के सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की रक्षा करना है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बेटा या रिश्तेदार बुजुर्ग के शांतिपूर्ण जीवन में बाधा बनता है, तो ट्रिब्यूनल उसे घर खाली करने का आदेश दे सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति के मालिकाना हक और हिस्सेदारी का अंतिम निर्णय सिविल कोर्ट ही करेगा, लेकिन इससे ट्रिब्यूनल की कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी। यह फैसला वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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