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शराब घोटाला: चैतन्य बघेल पर 200–250 करोड़ रुपये लेने का आरोप, ईओडब्ल्यू-एसीबी ने पेश की 8वीं चार्जशीट

By kadwaghut|22 Dec 2025, 9:54 PM
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने स्पेशल कोर्ट, रायपुर में आठवीं चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि चैतन्य बघेल को घोटाले की रकम में से करीब 200 से 250 करोड़ रुपये मिले।

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चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने आबकारी विभाग में अवैध वसूली के लिए एक शराब सिंडिकेट खड़ा किया, जिसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था। आरोप है कि वह प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संपर्क में रहते थे और उन्हें सिंडिकेट के हित में काम करने के निर्देश देते थे। इसी संरक्षण के चलते यह घोटाला लंबे समय तक चलता रहा।

ईओडब्ल्यू-एसीबी के मुताबिक अब तक शराब घोटाले की राशि 3,074 करोड़ रुपये सामने आ चुकी है, लेकिन जांच और अन्य सबूतों से संकेत मिलता है कि यह आंकड़ा 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। एजेंसियों ने करीब 3,800 पन्नों की चार्जशीट में चैतन्य बघेल को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया है। इस मामले में अब तक कुल आठ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं।

नई चार्जशीट में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ जांच की वर्तमान स्थिति, साथ ही हिरासत में लिए गए आरोपियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की रिपोर्ट भी शामिल की गई है। यह दस्तावेज जांच की प्रगति और आरोपियों की भूमिका को रेखांकित करता है।

चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाई। ये अधिकारी प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हित में काम करते थे और जमीनी स्तर पर नेटवर्क संचालकों—अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल—को निर्देश जारी करते थे।

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जांच एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों के माध्यम से शराब कारोबारी अनवर ढेबर की टीम द्वारा एकत्र की गई अवैध रकम को मैनेज किया और उसे ऊपर तक पहुंचाया। उन्होंने शराब व्यवसायी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की विभिन्न फर्मों के जरिए अपने हिस्से की रकम प्राप्त की, जिसे बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पारिवारिक फर्मों में ट्रांसफर कर रियल एस्टेट परियोजनाओं और अन्य निवेशों में लगाया गया। इसके अलावा परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहयोगियों के नाम पर भी घोटाले की रकम के निवेश का आरोप लगाया गया है।

ईओडब्ल्यू-एसीबी का कहना है कि सबूतों से स्पष्ट होता है कि चैतन्य बघेल ने उच्च स्तर पर अपराध की कमाई को मैनेज किया और अपने हिस्से के तौर पर लगभग 200–250 करोड़ रुपये हासिल किए। सिंडिकेट को मिली उच्चस्तरीय सुरक्षा, नीतिगत और प्रशासनिक दखल के कारण यह घोटाला लंबे समय तक फलता-फूलता रहा।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। एजेंसियों का दावा है कि इस कथित घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ, जबकि शराब सिंडिकेट से जुड़े लाभार्थियों को भारी आर्थिक फायदा पहुंचा।

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