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भोपाल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर तय, 32 हजार कर्मचारी काम बंद करने की तैयारी में

By Admin|19 May 2026, 10:23 AM
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भोपाल 

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारियों ने दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे नाराज कर्मचारियों में यह निर्णय लिया है। हड़ताल की स्थिति में सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऑनलाइन हेल्थ मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य योजनाओं का काम भी प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस मामले में कर्मचारियों ने कहा है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। इससे पहले सरकार की ओर से मांगों पर सहमति जताई गई थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है।

25 मई से शुरू होगा आंदोलन
आंदोलन की शुरुआत 25 से 27 मई तक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन से होगी। 28 और 29 मई को कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।

2 जून से काम का बहिष्कार
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गई तो 2 जून से ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि समय रहते मांगों का समाधान कर आम जनता को होने वाली असुविधा से बचाया जाए।

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ये हैं प्रमुख मांगें
संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करने, हर साल 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि महंगाई भत्ता, वेतन विसंगतियां दूर करने, नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां और समान काम के बदले समान वेतन की मांग उठाई है।

ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

    सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाए।
    न्यू पेंशन स्कीम (NPS) और हेल्थ इंश्योरेंस लागू किया जाए।
    अन्य राज्यों की तरह हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन बढ़ाया जाए।
    नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता दिया जाए।
    स्वास्थ्य अधिकारियों सहित अन्य पदों के वेतन में उचित संशोधन और पूर्व की तरह इंक्रीमेंट दिया जाए।
    वेतन संरचना में जो विसंगतियां हैं, उन्हें सुधारकर संशोधित किया जाए।
    संविदा कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश का लाभ दिया जाए।
    जब तक समान काम के बदले समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलती, तब तक यह मुद्दा प्राथमिकता से हल किया जाए।

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