मध्य प्रदेश

प्रदेश में पहली बार ऑनलाइन हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती

By Admin|05 Dec 2025, 9:20 PM
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ऑनलाइन भर्ती की यह पहल करने वाला पहला राज्य बना मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश की पूर्ण ऑनलाइन पारदर्शी चयन प्रणाली बनी राष्ट्रीय मॉडल

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भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से कहा कि आपकी जिम्मेदारी यशोदा मैया की तरह है, जिस प्रकार उन्होंने गोपाल कृष्ण का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कार प्रदान किए, उसी तरह आप भी आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है। हमें विश्वास है कि हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विधानसभा के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में नियुक्ति-पत्र प्रदान कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, विधायक तथा पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और विभाग की सचिव सुश्री जी.वी. रश्मि विशेष रूप से उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को अपने कार्य दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने, विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई। नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भी गांवों में आंगनवाड़ी वाली दीदी को जो सम्मान मिलता है, उतना किसी और को नहीं मिलता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका परिवार की सदस्य बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है। हमारी आंगनवाड़ी की बहनें इसे सार्थक कर रही हैं। यह बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं। इनकी वजह से लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों में ड्रापआऊट रेट में भी कमी आयी है। राज्य सरकार बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है। साथ ही बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को भी राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। शेष पद भरने के लिए भी तेजी से प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन पोर्टल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 2077 पदों के विरुद्ध 81 हजार 704 आवेदन आए और सहायिकाओं के 17 हजार 477 पदों के लिए 31 हजार 7627 आवेदन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप 50 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आभार स्वरूप धन्यवाद पत्र सौंपा गया।

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प्रमुख बिन्दु

    आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें।

    नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है।

    हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए।

    विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई।

    नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिक परिवार की सदस्य बन जाती हैं।

    न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है।

    बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं।

    लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है।

    स्कूलों में ड्राप-आऊट रेट में भी कमी आयी है।

    नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है।

    बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को।

    राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई।

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    प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए।

 

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