छत्तीसगढ़

खनिज क्षेत्रों की नीलामी के बाद अब सतही अधिकार सीधे जिला कलेक्टर से लिए जा सकेंगे

By Admin|27 Nov 2025, 1:26 PM
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नीलामी से आवंटित खनिज क्षेत्रों के शीघ्र संचालन हेतु केंद्र सरकार ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश; अब सफल बोलीदाता जिला कलेक्टर से सीधे माँग सकेंगे सतही अधिकार

 रायपुर 
खनन मंत्रालय, भारत सरकार ने खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 20A के तहत एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके माध्यम से राज्यों को सतही अधिकार मुआवज़ा निर्धारण और भूमि उपलब्धता की प्रक्रिया को समयबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह आदेश निजी भूमि खरीद में होने वाली देरी, बिचौलियों की भूमिका और भूमि मूल्य वृद्धि जैसी समस्याओं को समाप्त कर खनिज ब्लॉकों के शीघ्र संचालन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मुख्य प्रावधान: जिला कलेक्टर के माध्यम से सीधे सतही अधिकार प्राप्त करने की सुविधा

इस आदेश का सबसे बड़ा सुधार यह है कि अब नीलामी में सफल बोलीदाता सीधे जिला कलेक्टर के पास सतही अधिकार के लिए आवेदन कर सकेंगे।

पहले कंपनियों को भूमि मालिकों से सीधे भूमि खरीदनी पड़ती थी, जिससे:
* लंबी देरी,
* दलालों/मध्यस्थों की दखलअंदाजी,
* भूमि मूल्य का अनावश्यक बढ़ना, और
* परियोजना समय-सीमा में बाधा जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं।

अब सतही अधिकार जिला प्रशासन/राजस्व विभाग के माध्यम से दिए जाएँगे, जिससे:
प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी,
दलालों की भूमिका समाप्त होगी
परियोजना शीघ्र शुरू होगी,
वास्तविक भूमि मालिक को पूरा और उचित लाभ मिलेगा ।

राज्यों के लिए अनिवार्य समय-सीमाएँ

आदेश के अनुसार:
    1.    राज्य 30 दिनों के भीतर मुआवज़ा निर्धारण हेतु अधिकारी नियुक्त करें (नियम 52, MCR-2016)।
    2.    नियुक्ति न होने पर जिला कलेक्टर/DM/DC स्वतः अधिकृत अधिकारी माने जाएँगे।
    3.    वार्षिक सतही मुआवज़ा प्रत्येक वर्ष 30 जून तक अनिवार्य रूप से देय होगा।
    4.    वर्ष के मध्य में खनन शुरू होने पर प्रो-राटा मुआवज़ा अग्रिम रूप से देना होगा।
    5.    प्राप्त आवेदन पर मुआवज़ा निर्धारण का निर्णय 90 दिनों में अनिवार्य है।
    6.    धारा 24A के अनुसार खनन क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

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सुधार का उद्देश्य

सैकड़ों खनिज ब्लॉक नीलाम होने के बावजूद, सतही अधिकार प्राप्त करने में देरी के कारण बहुत कम ब्लॉक चालू हो पाए हैं। यह आदेश:
* खनन परियोजनाओं की गति बढ़ाएगा,
* उत्पादन में वृद्धि करेगा,
* स्थानीय रोजगार सृजित करेगा, और
* राज्यों की राजस्व प्राप्ति (प्रीमियम, रॉयल्टी, DMF आदि) बढ़ाएगा।

उद्योग जगत, विशेष रूप से नेशनल एम्प्लॉयर्स फेडरेशन (NEF) ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे “गेम-चेंजर” बताया है, जो भूमि संबंधी अड़चनों को दूर करके वास्तविक किसानों और भूमि मालिकों को लाभ देगा।

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