छत्तीसगढ़

CG : अंबिकापुर में रिजर्व फॉरेस्ट पर चला बुलडोजर, 200 एकड़ वनभूमि से हटाया जा रहा अवैध कब्जा …

By kadwaghut|08 May 2026, 3:50 PM
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अंबिकापुर । अंबिकापुर में संरक्षित वन भूमि पर वर्षों से चल रहे अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर महामाया पहाड़ स्थित रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में शुक्रवार सुबह से बेदखली अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पक्के और कच्चे मकानों को बुलडोजर से तोड़ा जा रहा है। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

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बताया जा रहा है कि डबरी पानी, घुटरापारा और नवागढ़ क्षेत्र में पिछले करीब 10 वर्षों से संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे का खेल चल रहा था। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के चलते यह कब्जा लगातार बढ़ता गया। भाजपा नेता और नगर निगम पार्षद आलोक दुबे ने हाल ही में सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता और रिजर्व फारेस्ट एरिया में बंगलादेशी मुसलमानों के कब्जे को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को निर्देश जारी किया था।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया और तीन दिनों के भीतर वन विभाग तथा जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। मौके पर एसडीएम, तहसीलदार, डीएफओ सरगुजा और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जानकारी के मुताबिक, रिजर्व फॉरेस्ट के कक्ष क्रमांक 2581 और 2582 की लगभग 200 एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर लोगों ने मकान बना लिए थे और खेती-बाड़ी भी शुरू कर दी थी। वन क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई और अवैध बसाहट बढ़ने के बावजूद लंबे समय तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।

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भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आए लोगों ने बिना पुलिस सत्यापन के वन भूमि पर कब्जा कर लिया। उन्होंने तत्कालीन वन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए और डीएफओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी।

वन विभाग की ओर से मार्च 2026 में 157 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी किया गया था, लेकिन तय समयसीमा गुजरने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच कुछ लोगों ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी प्राप्त कर लिया था।

अब प्रशासन का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।

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