मध्य प्रदेश

MP ने फाइनल किया फायर सेफ्टी ड्राफ्ट, अब शादी-सभा पंडाल फायर प्रूफ और ऊंची इमारतों में सर्टिफिकेट अनिवार्य

By Admin|25 Nov 2025, 9:02 AM
f X W

भोपाल 
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2025 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट से जुड़ी सारी अनुमतियां ले ली गई हैं। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधेयक के रूप पेश किया जायेगा। 

Advertisement
Advertisement

नए कानून के ड्राफ्ट के मुताबिक, अब 15 मीटर से ऊंची हर इमारत, स्कूल, अस्पताल, मॉल और फैक्ट्री के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। इसके बिना बिल्डिंग को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। वहीं शादी, पॉलिटिकल और धार्मिक आयोजन के पंडाल में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा अग्निरोधी होना अनिवार्य होगा, यानी ऐसे मटेरियल का कपड़ा, जो जल्दी आग न पकड़े।

पंडालों और बड़े आयोजनों की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों पर डालते हुए उन्हें 'सेल्फ-रेगुलेटरी' घोषित किया गया है। लापरवाही बरतने पर अब सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ेगी। 8 सवालों के जवाब से समझिए कि आखिर नए फायर सेफ्टी एक्ट की क्या जरूरत पड़ी? इमारतों के लिए क्या नियम रहेंगे और आम लोगों को क्या फायदा मिलेगा, कितना टैक्स देना पड़ेगा…

1. क्यों पड़ी एक नए और सख्त कानून की जरूरत? अब तक मध्य प्रदेश में फायर सेफ्टी के नियम अलग-अलग नगर निकायों और विभागों के अधीन थे, जिससे एकरूपता और जवाबदेही का अभाव था। पुराने नियम न तो आधुनिक निर्माण चुनौतियों का सामना करने में सक्षम थे और न ही उनमें लापरवाही बरतने वालों के लिए कोई कठोर दंड का प्रावधान था।

2. नया एक्ट इस समस्या को कैसे दूर करेगा? नया फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2025 इसी बिखरी हुई और कमजोर व्यवस्था को खत्म कर पूरे राज्य के लिए एक एकीकृत, आधुनिक और शक्तिशाली फायर सर्विस की स्थापना करेगा, जिसके पास नियम लागू करवाने के लिए अभूतपूर्व अधिकार होंगे।

READ ALSO  जिला अस्पताल में महिला कर्मचारी की शिकायत से मचा हड़कंप

3. कैसा होगा फायर सर्विस का स्ट्रक्चर?

    कमिश्नर और डायरेक्टर की होगी नियुक्ति: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कमिश्नर ही फायर एंड इमरजेंसी सर्विस का कमिश्नर होगा। सरकार एक डायरेक्टर को भी नियुक्त करेगी। यह ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके पास अनुभव, जानकारी और इस क्षेत्र में अच्छे काम का रिकॉर्ड हो। यह डायरेक्टर, कमिश्नर के अधीन रहकर काम करेगा।

    पुलिस थानों की तर्ज पर फायर स्टेशन: सरकार आबादी, औद्योगिक क्षेत्र, बिजनेस सेंटर्स के हिसाब से नए फायर स्टेशन खोल सकेगी। पुलिस थानों की तरह ही हर फायर स्टेशन की सीमा तय रहेगी ताकि आग लगने की घटनाओं के बाद तत्काल एक्शन लिया जा सके। हर फायर स्टेशन पर एक डिप्टी फायर ऑफिसर या उससे ऊपर के पद के फायर ऑफिसर की नियुक्ति होगी।

4. बिल्डिंग मालिकों की क्या जिम्मेदारियां रहेंगी? अब तक कई व्यवसायिक और रिहायशी इमारतें फायर सेफ्टी के मानकों को ताक पर रखकर चल रही थीं, लेकिन अब ऐसा करना असंभव होगा। नए कानून के तहत 15 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली रिहायशी और व्यवसायिक इमारतों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, गेस्ट हाउस, मॉल, मल्टीप्लेक्स, फैक्ट्री, गोदाम के लिए भी ये जरूरी होगा।

वहीं, औद्योगिक प्रतिष्ठान और 500 वर्ग मीटर से बड़े क्षेत्रफल वाली कोई भी मिक्स-यूज बिल्डिंग के लिए ये अनिवार्य होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के किसी भी बिल्डिंग को नगर निगम से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं मिलेगा, जिसका सीधा मतलब है कि बिल्डर तब तक बिल्डिंग को बेच या किराए पर नहीं दे पाएगा, जब तक कि वह आग से सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा न कर ले।

READ ALSO  अगले ढाई साल में प्रदेश की 100 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बनाएंगे सिंचित

साथ ही, सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव की रिपोर्ट साल में दो बार फायर विभाग को सौंपनी होगी।

5. शादी और धार्मिक आयोजन के पंडालों के लिए क्या होंगे नियम? त्योहार, मेले, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में लगने वाले पंडाल आग के लिहाज से सबसे संवेदनशील होते हैं। नए कानून में पंडालों को 'सेल्फ-रेगुलेटरी' घोषित कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अब आयोजक की होगी।

    लिखित घोषणा जरूरी: आयोजक को पंडाल में एक बोर्ड लगाकर यह लिखित घोषणा करनी होगी कि उसने फायर सेफ्टी के सभी नियमों का पालन किया है।

    सुरक्षा मानक: आयोजक को फायर-रिटार्डेंट (अग्निरोधी) कपड़े का इस्तेमाल, पर्याप्त चौड़े प्रवेश-निकास द्वार, इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और सुरक्षित बिजली वायरिंग सुनिश्चित करनी होगी।

    अधिकारी का अधिकार: फायर ऑफिसर किसी भी पंडाल का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। यदि घोषणा झूठी पाई गई या सुरक्षा में कोई कमी मिली, तो वे पंडाल को तुरंत सील कर सकते हैं। झूठी घोषणा करने पर आयोजक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

6. फायर सर्टिफिकेट और एनओसी कैसे मिलेगी? इसके लिए एक ऑनलाइन सिस्टम डेवलप करने की सिफारिश की गई है। ये ICT आधारित ऑनलाइन प्रणाली होगी, जिसमें सभी तरह के फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी हासिल कर सकेंगे। इस सिस्टम को डेवलप करने का मकसद भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करना भी है।

7. फायर अफसरों को क्या अधिकार मिलेंगे नया कानून फायर विभाग के अधिकारियों को इतने अधिकार देता है, जितने पहले कभी नहीं थे ताकि वे बिना किसी दबाव के सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

READ ALSO  टैलेंट खोजने से मेडल जीतने तक नया प्लान! MP में खेलों पर 5 साल में 1,965 करोड़, जानें 6 बड़े बदलाव

    इमारत सील करने का अधिकार : यदि कोई इमारत आग के दृष्टिकोण से खतरनाक है, तो फायर अधिकारी उसे तुरंत खाली करने और सील करने का आदेश दे सकते हैं। सील तोड़ने पर जेल का प्रावधान है।

    तोड़-फोड़ और गिरफ्तारी: आग बुझाने के दौरान फायर ऑफिसर किसी भी रास्ते को बंद कर सकते हैं, बाधा डालने वाले लोगों को गिरफ्तार कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी दीवार या संरचना को तोड़ने का आदेश भी दे सकते हैं।

    अतिक्रमण हटाना: आग के खतरे वाली जगहों पर रखे सामान या अतिक्रमण को फायर अधिकारी तुरंत हटाने का आदेश दे सकते हैं। आदेश न मानने पर एसडीएम की मदद से सामान जब्त कर नीलाम भी किया जा सकता है।

    पानी पर पहला हक: आग बुझाने के लिए फायर सर्विस किसी भी निजी या सार्वजनिक स्रोत-जैसे कुआं, टंकी, तालाब या बोरवेल से पानी ले सकती है। पानी की आपूर्ति में बाधा डालने वालों पर कठोर दंड लगेगा।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins