मध्य प्रदेशराज्‍य

जिला अस्पताल में महिला कर्मचारी की शिकायत से मचा हड़कंप

By Admin|03 Sep 2026, 2:54 PM
f X W

जिला अस्पताल में महिला कर्मचारी की शिकायत से मचा हड़कंप

सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप—यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, वेतन रोकने और पद के दुरुपयोग की शिकायत; निष्पक्ष जांच की मांग

बड़वानी
 जिला चिकित्सालय बड़वानी में पदस्थ फिजियोथेरेपिस्ट सुश्री नमिता बावने ने सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना के विरुद्ध महिला थाना प्रभारी को दी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कथित यौन उत्पीड़न, लैंगिक रूप से अनुचित व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग, कार्यालय में भय का वातावरण बनाने तथा वेतन एवं अवकाश से संबंधित कार्रवाई का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके 71 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती रहे और उन्हें लगातार उनकी देखभाल के लिए अवकाश की आवश्यकता थी। आरोप है कि चिकित्सा संबंधी परिस्थितियों के बावजूद उनका अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया तथा करीब 75 दिनों का वेतन रोक दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वेतन भुगतान और अवकाश को लेकर बार-बार आवेदन देने के बावजूद संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।

“शाम को अकेले मिलने का दबाव बनाने का आरोप”
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिविल सर्जन द्वारा कार्यालय समय के बाद मिलने के लिए बुलाया गया तथा कथित तौर पर कहा गया कि यदि शिकायतकर्ता उनके साथ मित्रवत व्यवहार करेंगी तो अवकाश और वेतन संबंधी मदद की जाएगी। शिकायतकर्ता ने इसे मानसिक दबाव और अनुचित व्यवहार बताया है।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब शिकायत के अनुसार 5 अगस्त 2026 को उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते समय उनके सीने पर हाथ रखकर धक्का देने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि विरोध करने पर भी उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया।

READ ALSO  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने PM मोदी से की 20 मिनट मुलाकात, राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज

“गलत बात का विरोध किया तो वेतन रोक दिया”
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व में भी मई 2023 में इसी प्रकार का व्यवहार किए जाने की कोशिश हुई थी। उनके विरोध के बाद जुलाई 2026 का वेतन रोक दिए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है। इस संबंध में 24 जुलाई और 4 अगस्त को सिविल सर्जन को पत्र देने तथा जवाब में उच्च कार्यालय से मार्गदर्शन लेने की बात कहे जाने का उल्लेख शिकायत में है।

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके विरुद्ध समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं होने संबंधी पत्र जारी कर कलेक्टर के नाम का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके अनुसार वे निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित थीं।

जांच के दौरान दबाव नहीं बनाने की मांग
शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक या दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई से सुरक्षा देने तथा आरोपी अधिकारी को शिकायतकर्ता के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण से अलग रखने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए दबाव अथवा धमकी दिए जाने की आशंका है। उन्होंने मामले में गोपनीयता बनाए रखने और निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी करने का अनुरोध किया है।

पिता की बीमारी और आर्थिक संकट का भी हवाला
शिकायत में कहा गया है कि शिकायतकर्ता अपने वृद्ध माता-पिता की इकलौती अविवाहित संतान हैं। पिता गंभीर रूप से बीमार हैं, जबकि माता भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। वेतन रुकने के कारण परिवार पर आर्थिक संकट आने और इलाज व घरेलू खर्च प्रभावित होने की बात भी आवेदन में कही गई है।

READ ALSO  BJP ने मैथिली ठाकुर को सौंपी नई जिम्मेदारी, भाजयुमो की राष्ट्रीय टीम में बिहार के 6 युवा नेता शामिल

अब सवाल जांच की निष्पक्षता पर
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए इतने गंभीर आरोपों की जांच किस स्तर पर और कितनी निष्पक्षता से होती है। शिकायत में स्वयं पद के दुरुपयोग और शिकायतकर्ता पर दबाव की आशंका जताई गई है। ऐसे में क्या विभाग आरोपी अधिकारी को जांच से प्रभावित होने की किसी भी संभावना से दूर रखेगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

जब इस संबंध में सिविल सर्जन मनोज खन्ना से बात करना चाहि तो उनके द्वारा पहले तो मोबाइल रिसीव नहीं किया बाद में उन्होंने बताया कि मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार है

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button