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CG : कृषि विभाग ने प्राइवेट कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, करीब 2.84 करोड़ रुपये का माल जब्त किया…

By lokesh sharma|18 Dec 2025, 11:12 AM
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दुर्ग । छत्तीसगढ़ में किसानों को गुमराह कर अवैध रूप से जैव प्रेरक (बायो-स्टिमुलेंट) बेचने के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग ने बिना वैध प्राधिकार पत्र के जैव प्रेरक का व्यापार कर रही डायरेक्ट सेलिंग कंपनी ड्रेकी मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2.84 करोड़ रुपये मूल्य का जैव प्रेरक (ह्यूमिक एसिड) जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान भंडारण स्थल को सील कर दिया गया है और संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। संभागीय संयुक्त संचालक कृषि, दुर्ग संभाग के निर्देशन में 15 दिसंबर 2025 को संभाग स्तरीय संयुक्त जांच टीम ने जिला दुर्ग के विकासखंड दुर्ग अंतर्गत ग्राम पंचायत धनोरा, आनंद नगर स्थित कंपनी परिसर में दबिश दी।

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जांच टीम में संभाग स्तरीय निरीक्षक हेमंत कुमार बघेल, जिला निरीक्षक सुचित्रा दरबारी, क्षेत्रीय उर्वरक निरीक्षक नवीन खोब्रागढे, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सोनाली कुजूर एवं अजय यादव शामिल रहे। टीम ने प्रतिष्ठान में भंडारित उत्पादों की सघन जांच की। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान प्रभारी धनेश साहू ने स्वीकार किया कि कंपनी द्वारा किसानों को कृषि कार्य में उपयोग होने वाला जैव प्रेरक ह्यूमिक एसिड प्रदेश के कई जिलों में एजेंटों के माध्यम से बेचा जा रहा है। जबकि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की छठी अनुसूची के तहत जैव प्रेरक को अधिसूचित किया गया है और इसके भंडारण व विक्रय के लिए संचालनालय कृषि से राज्य-स्तरीय तथा जिले में उप संचालक कृषि कार्यालय से पृथक-पृथक विक्रय प्राधिकार पत्र अनिवार्य है।

जांच के दौरान कंपनी कोई भी वैध प्राधिकार पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी। इतना ही नहीं, प्रतिष्ठान प्रभारी द्वारा बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर जैसे आवश्यक प्रमाणित दस्तावेज भी नहीं दिखाए गए। पूछताछ में बताया गया कि 1 जनवरी से 15 दिसंबर के बीच 49,360 बोतल (प्रत्येक 1 लीटर) का भंडारण किया गया, जिनमें से 38,668 बोतल विक्रय कर दी गईं। शेष स्टॉक के बारे में पहले केवल 1,326 बोतल शेष होने की जानकारी दी गई, लेकिन गहन जांच में प्रथम तल के बड़े गोदाम से 630 पेटियों में रखी लगभग 7,560 बोतल अतिरिक्त बरामद की गईं। इस प्रकार कुल 8,886 बोतल अवैध जैव प्रेरक ह्यूमिक एसिड जब्त किया गया। वर्तमान अधिकतम विक्रय मूल्य 3,200 रुपये प्रति बोतल के आधार पर जब्त सामग्री की कीमत 2,84,35,200 रुपये आंकी गई है।

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कृषि विभाग ने भंडार स्थल को सील कर सामग्री को सुपुर्दगी में दिया तथा विक्रय से संबंधित इनवॉइस, रजिस्टर और कच्ची बिल बुक भी जब्त कर ली। जांच के तहत जैव प्रेरक के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। साथ ही कंपनी के प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस में अपना पक्ष जिला दुर्ग स्थित उप संचालक कृषि एवं संयुक्त संचालक कृषि कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अनियमितता सिद्ध होने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी उर्वरक या जैव प्रेरक को खरीदने से पहले उसके पंजीकरण, प्राधिकार पत्र और गुणवत्ता की जांच अवश्य करें। विभाग का कहना है कि अवैध और गुणवत्ताहीन उत्पाद न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि फसल उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। राज्यभर में इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आगे भी सघन जांच अभियान जारी रहेगा।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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