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डोंगरगढ़ से जिला भाजपा संगठन मे नहीं मिला किसी को प्रतिनिधित्व, कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश

By kadwaghut|13 Oct 2025, 8:15 PM
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राजनांदगाव. 1980 के बाद पहली बार जिला भाजपा संगठन में डोंगरगढ़ पूरी तरह बाहर — स्थानीय नेताओं ने जताई नाराज़गी

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राजनांदगांव।
जिला भाजपा संगठन की नई घोषणा के बाद डोंगरगढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, 1980 के दशक से अब तक पहली बार ऐसा हुआ है जब जिला भाजपा संगठन में डोंगरगढ़ क्षेत्र से किसी भी नेता को स्थान नहीं मिला है। इस निर्णय को लेकर कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों में निराशा का माहौल है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि डोंगरगढ़ भाजपा में वर्षों से सक्रिय रहे कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि इस बार जिले के संगठन में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन किसी भी नाम को शामिल न किए जाने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

कार्यकर्ताओं में सवाल – “डोंगरगढ़ की उपेक्षा क्यों?”

कई भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र लगातार संगठन की रीढ़ रहा है, फिर भी इस बार उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा —

“भाजपा में आखिर ऐसा कौन सा नेतृत्व आ गया है जो डोंगरगढ़ की उपेक्षा करने के लिए तैयार बैठा है? 1980 से लेकर अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ।”

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं – नुकसान तय

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए कठिनाई खड़ी कर सकता है।
पिछले कुछ वर्षों से डोंगरगढ़ क्षेत्र में भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधित्व न देना पार्टी के लिए और नुकसानदायक साबित हो सकता है।

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विश्लेषकों का कहना है कि संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का अभाव मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं की रणनीति पर भी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, डोंगरगढ़ के भाजपा कार्यकर्ता अब इस उपेक्षा के विरोध में अपनी अलग रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। कई स्थानीय नेता पार्टी नेतृत्व से संवाद करने और स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी में हैं।

एक युवा कार्यकर्ता ने कहा —

“हम भाजपा के प्रति समर्पित हैं, लेकिन डोंगरगढ़ की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले चुनाव में इसका असर ज़रूर दिखेगा।”

निष्कर्ष

डोंगरगढ़ को संगठन में स्थान न मिलने से न केवल कार्यकर्ताओं में असंतोष है, बल्कि यह निर्णय आने वाले समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है — या फिर यह नाराज़गी भविष्य में पार्टी के लिए चुनौती बन जाएगी।

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