छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

शासकीय आयोजन में राजनीतिक भेदभाव? डां रमनसिंह के विधायक प्रतिनिधि भीमनानी को आमंत्रण न देकर गरमाई सियासत

By kadwaghut|04 Feb 2026, 2:29 PM
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राजनांदगांव में आयोजित होने जा रहे छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव 2025-26 के निमंत्रण पत्र ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस भव्य शासकीय आयोजन में विधायक प्रतिनिधि रुपचंद भीमनानी को आमंत्रण नहीं दिया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस महोत्सव को सरकार की उपलब्धियों से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन उसी सरकार के जनप्रतिनिधि के अधिकृत प्रतिनिधि को कार्यक्रम से दूर रखना सीधे तौर पर राजनीतिक उपेक्षा माना जा रहा है।

यह मामला अब केवल निमंत्रण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे जानबूझकर की गई अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि विधायक प्रतिनिधि भीमनानी जनता और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनका नाम निमंत्रण सूची से गायब होना सामान्य भूल नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन दबाव में काम कर रहा है या फिर आयोजन समिति ने राजनीतिक संतुलन को ताक पर रख दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक न तो आयोजन समिति और न ही संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है। चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। यदि यह केवल तकनीकी चूक होती तो अब तक सुधार कर स्थिति स्पष्ट कर दी जाती।
रजत जयंती जैसे ऐतिहासिक अवसर पर इस तरह का विवाद शासन की छवि पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में स्पष्टीकरण देता है या राजनीतिक दबाव में चुप्पी साधे रहता है।

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*“न बुलाया गया, न पूछा गया” — रजत जयंती महोत्सव पर रूपचंद भीमनानी का तीखा बयान*


छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव 2025-26 के निमंत्रण को लेकर उठे विवाद के बीच जब इस विषय में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के विधायक प्रतिनिधि रूपचंद भीमनानी से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट और तीखी प्रतिक्रिया दी।


रूपचंद भीमनानी ने कहा, “मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। न तो मुझे इस कार्यक्रम में बुलाया गया और न ही मुझसे कोई संपर्क किया गया।” उन्होंने आगे कहा कि जब विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के प्रतिनिधि की यह स्थिति है, तो राजनांदगांव की आम जनता की स्थिति क्या होगी,

इसका अंदाजा लोग स्वयं लगा सकते हैं।
भीमनानी के इस बयान के बाद पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति को निमंत्रण न देने का मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की अनदेखी और प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के शासकीय आयोजनों में जनप्रतिनिधियों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को दरकिनार करना जनता की आवाज को दबाने जैसा है।

सवाल यह उठता है कि रजत जयंती जैसे ऐतिहासिक अवसर पर प्रशासन किसे प्रतिनिधित्व दे रहा है और किसे जानबूझकर बाहर रखा जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर आयोजन समिति और संबंधित विभाग की चुप्पी लगातार सवालों को और गहरा कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर सफाई देता है या फिर जनता को ही अपने हालात का जवाब खुद ढूंढना पड़ेगा।

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