मध्य प्रदेश

AP सिंह रिटायर होंगे, अरविंद शर्मा संभाल सकते हैं विधानसभा प्रमुख सचिव का पद

By Admin|10 Sep 2025, 7:01 PM
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भोपाल 

लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं.

मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है।

प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है।

1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी

वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा।

अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं।

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इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है।

दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि

विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है.

मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे.

प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल

मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

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एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं

एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है।

डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर

विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं।

विधानसभा सचिव पद की स्थिति

विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं।

विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।

 

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