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अवध से लखनऊ तक छाई ‘महिला सामर्थ्य योजना’, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल

By Admin|24 Apr 2026, 8:11 PM
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 लखनऊ

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं।

डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी
इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है।

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शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव
योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं।

सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा
योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।

 

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