छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : शास्त्री जी सादगी त्याग और सत्य पर विश्वास के अकल्पनीय उदाहरण: इंद्रनील शंकर दानी…

राजनांदगांव , शास्त्री जी की सादगी और त्याग तथा सत्य पर विश्वास अकल्पनीय उदाहरण है। यह बात पूर्व प्रमुख सचिव इंद्रनील शंकर दानी ने शास्त्री जी की 107वीं जयंती के अवसर पर आयोजित परिसंवाद में बतौर मुख्य अतिथि की आसंदी से कही। पंडित शिवकुमार शास्त्री की 107वीं जयंती का कार्यक्रम कान्यकुब्ज सभा के द्वारा रूप में आयोजित किया गया। सुबह10 बजे कौरिनभांठा स्थित कान्यकुब्ज समाज के सांस्कृतिक भवन में शास्त्री जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

शाम बजे परिसंवाद के पहले शास्त्री जी के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इससे साथ ही परिसंवाद का कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य अतिथि इंद्रनील शंकर दानी आईएएस पूर्व अपर मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन ने अनेक संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि जब शास्त्री जी खादी ग्रामोद्योग के उपाध्यक्ष थे तब दानी ने शास्त्री जी की प्रशासनिक क्षमता एवं सूझबूझ की प्रशंसा मुक्त कंठ से की थी। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी सत्य, अहिंसा और राष्ट्र धर्म की प्रतिमूर्ति थे।

समाज सुधारक, वैदिक विद्वान व राजनीतिज्ञ थे उन्होंने बताया कि शिव कुमार शास्त्री भारतीय राजनीतिज्ञ, समाज सुधारक और वैदिक विद्वान थे। उन्होंने 1967 में चौथी लोकसभा में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। 1971 में भारतीय क्रांति दल में शामिल हो गए थे। भारतीय राजनीति में उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया। विभा द्विवेदी, मदन मोहन मिश्रा, ममता अवस्थी, निधि बाजपेई, स्व. शिव कुमार शास्त्री स्मृति कृषि कॉलेज, शिवा पब्लिक स्कूल भिलाई, सर्व ब्राह्मण सभा राजनांदगांव, कान्यकुब्ज सभा सदस्यों ने कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज की। शास्त्री जी के कार्यों को याद किया गया।

वेद, पुराण, उपनिषद, ज्योतिष के प्रकांड विद्वान थे कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता वीरेंद्र पांडेय पूर्व मंत्री ने कहा कि आने वाली पीढिय़ां यह विश्वास नहीं कर सकेगी कि भारतीय राजनीति में ऐसा भी व्यक्तित्व होता था। वे वेद पुराण, उपनिषद एवं ज्योतिष के प्रकांड विद्वान थे। शास्त्री जी के व्यक्तित्व व्यवहार एवं विचारों से सभा को अवगत कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनायक तांबे मध्य प्रदेश के प्रभारी स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि शास्त्री जी राजनीति के आदर्श पुरुष थे। उन्हें सत्ता से मोह नहीं था प्रखर राष्ट्रवादी कुशल संगठक एवं समन्वयक सत्य के स्पष्ट वक्ता थे।

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