
राजनांदगांव : स्कूल की शैक्षणिक, सांस्कृतिक गतिविधि और नवाचारों को सराहा
राजनांदगांव , इग्नाइट स्कूल गंजपारा का केंद्रीय टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने स्कूल में विगत सालों में छात्र और स्कूल हित में किए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नवाचारों का अवलोकन कर सराहना की। टीम ने विद्यार्थियों के नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल में चयन, खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन, शैक्षणिक गतिविधियों में भागीदारी को सराहा। स्कूल में संचालित स्टूडेंट हैंडबुक, बैगलेस डे, जुंबा और व्यायाम, आर्ट एंड क्राफ्ट, शैक्षणिक भ्रमण, पहली पत्रिका इग्नाइट जैसे प्रयासों की सराहना की।
स्कूल में विगत वर्षों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से फैंसी ड्रेस स्पर्धा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, कविता एवं कहानी गतिविधियां, आर्ट एंड क्राफ्ट चार्ट एवं मॉडल निर्माण और कर के सीखो गतिविधियां शामिल है। बैगलेस डे के अंतर्गत बच्चों के लिए जुंबा, व्यायाम एवं रोचक गतिविधियों का आयोजन कर सीखने को आनंदमय बनाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विद्यालय में किचन गार्डन एवं ईको क्लब का संचालन किया जा रहा है।
बच्चों में नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता का विकास हो रहा नेतृत्व क्षमता को विकसित करने का उद्देश्य लेकर हेड बॉय, हेड गर्ल, कक्षा कैप्टन एवं सेकंड कैप्टन का चयन किया जाता है। वहीं विद्यार्थियों को मेडिकल, हेल्थ, सफाई, मेंटेनेंस एवं मिड-डे मील की जिम्मेदारी सौंपकर उनमें प्रबंधन कौशल विकसित किया जाता है। विद्यालय द्वारा समय-समय पर शैक्षणिक भ्रमण, जैसे भिलाई स्थित मैत्री गार्डन की यात्रा का आयोजन किया गया। साथ ही कक्षा 4 के विद्यार्थियों द्वारा कक्षा 5 के विद्यार्थियों को विदाई समारोह देना अनुशासन एवं आपसी स्नेह का उत्कृष्ट उदाहरण है।
नियमित समर क्लासेस का आयोजन भी किया जा रहा बाल मेला, स्टूडेंट डेली डायरी एवं वार्तालाप अभ्यास, समर क्लासेस का आयोजन भी नियमित रूप से किया जाता है। स्कूल के भूतपूर्व छात्र जो वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं, उन्हें एलुमिनी मीट के माध्यम से विद्यालय से जोड़ा जा रहा है। उनके प्रेरक विचार एवं मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। स्कूल की उपलब्धियों व रचनात्मक गतिविधियों को समाहित कर स्कूल की एक प्रथम पत्रिका इग्नाइट का विमोचन भी किया। जिसमें एसएमसी व शिक्षकों का योगदान रहा।



