दरभंगा
बिहार में दरभंगा जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है।
आधुनिक तकनीक और उन्नत मछली प्रजातियों के सहारे जिले में मत्स्य पालन को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
किसानों को मिला उन्नत मछलियों का स्पान
मत्स्य निदेशालय, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग तथा बिहार एक्कावाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (बीएआइपी) के संयुक्त प्रयास से मंगलवार को जिले के चयनित मत्स्य पालकों के बीच उन्नत मछलियों का स्पान वितरित किया गया। प्रथम चरण में नौ मत्स्य पालकों को 21 लाख जयंती रोहू और 18 लाख अमृत कतला का स्पान उपलब्ध कराया गया।
वैज्ञानिक तकनीक से तैयार प्रजातियां
जिला मत्स्य पदाधिकारी अनुपम कुमार ने बताया कि जयंती रोहू और अमृत कतला उच्च उत्पादन क्षमता वाली उन्नत प्रजातियां हैं। इन्हें वैज्ञानिक चयन प्रजनन तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इन मछलियों की वृद्धि सामान्य प्रजातियों की तुलना में अधिक तेज होती है, जिससे किसानों को कम समय में ज्यादा उत्पादन प्राप्त होगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
उन्होंने कहा कि उन्नत प्रजातियों के उपयोग से मत्स्य पालकों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलने के साथ किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। विभाग का उद्देश्य मत्स्य पालन को रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बनाना है।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलेगा
बीएआइपी टीम के राहुल कुमार ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में उन्नत मत्स्य प्रजातियों का विस्तार करना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
समावेशी विकास की दिशा में पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रजातियों के प्रयोग से दरभंगा में मत्स्य पालन का व्यापक विकास होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
