
Animal Husbandry Tips: गर्मियों में पशुओं का दूध बढ़ाने चारे में मिलकर दे ये 5 चीजें फिर देखे सुबह-शाम बाल्टी भर-भर दूध
Animal Husbandry Tips: डेयरी व्यवसाय में सबसे बड़ी चुनौती जानवरों को सही चारा देना है, ताकि वे स्वस्थ रहें और भरपूर मात्रा में दूध दें। गर्मियों के महीनों में, जब चारे की कमी हो जाती है, तो पशुपालक अक्सर अपने जानवरों को हरे चारे के रूप में नेपियर घास खिलाते हैं। हालाँकि, इसका अक्सर दूध उत्पादन के स्तर पर कोई खास असर नहीं पड़ता।
ये भी पढ़े :-Paramparagat Krishi Vikas Yojana: जैविक खेती करने पर सरकार किसानों को दे रही मदद, जाने इस योजना के बारे में
फिर भी, यदि आप बहराइच के एक पशुपालक द्वारा अपनाए गए पारंपरिक तरीके को अपनाते हैं, तो आपको न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि आपके जानवरों की दूध देने की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाएगी। आगे पढ़ें और जानें कि आप नेपियर घास में कौन-कौन सी चीज़ें मिलाकर एक बेहतरीन आहार तैयार कर सकते हैं, जो आपके जानवरों को तंदुरुस्त और स्वस्थ रखेगा।
Animal Husbandry Tips: घर पर चारा तैयार करने के लिए सामग्री
बहराइच ज़िले के तुरेनी रज्जब गाँव के पशुपालक राणा चेतन सिंह ने गायों और बछड़ों के लिए विशेष रूप से तैयार एक खास आहार योजना बताई है। इस योजना का पालन करने से आपके जानवर पूरी तरह स्वस्थ रहेंगे। यदि आप 1 क्विंटल (100 किलोग्राम) पशु आहार तैयार करना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित अनुपात का उपयोग कर सकते हैं:-
इस विशेष आहार को बनाने के लिए आपको 1.5 से 2 किलोग्राम मिनरल मिक्सचर (खनिज मिश्रण),
- 1 किलोग्राम सोंठ (सूखी अदरक),
- 2 किलोग्राम गुड़,
- 25 से 30 किलोग्राम चावल की भूसी (राइस ब्रान),
- और बराबर मात्रा में मक्का तथा
- चुनी-चोकर (दाल और गेहूं की भूसी का मिश्रण) की आवश्यकता होगी।
इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर एक समान मिश्रण तैयार कर लें, और फिर इस मिश्रण को बारीक कटी हुई हरी नेपियर घास के साथ मिलाकर अपने जानवरों को खिलाएँ। जानवर इस मिश्रण को बड़े चाव से खाते हैं, और इससे उनके समग्र स्वास्थ्य तथा दूध देने की क्षमता, दोनों में ही काफी सुधार होता है।
Animal Husbandry Tips: स्वच्छता का ध्यान
राणा चेतन सिंह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जानवरों को स्वस्थ रखने के लिए केवल अच्छा भोजन देना ही काफी नहीं है; उनके रहने का माहौल और साफ-सफाई की स्थितियाँ भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। पशुपालकों को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस जगह पर जानवर बांधे जाते हैं, उस जगह की रोज़ाना सफाई और कीटाणु-रहित (सैनिटाइज़) किया जाए। इसके अलावा, जानवरों के शरीर पर गंदगी और धूल-मिट्टी जमा न होने दें, और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें नियमित अंतराल पर नहलाया जाए। इसके अलावा, जानवरों की समय-समय पर पशु चिकित्सक से जाँच करवाना बहुत ज़रूरी है, ताकि किसी भी संभावित बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही चल जाए और पशुओं का सही इलाज सुनिश्चित हो सके।
Animal Husbandry Tips: बीमारियों की रोकथाम
बरसात का मौसम शुरू होते ही, पशुओं में बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासकर बाढ़-संभावित इलाकों में रहने वाले पशुओं को ‘हेमोरेजिक सेप्टिसीमिया’ (गलघोंटू) और ‘खुरपका-मुँहपका रोग’ जैसी खतरनाक बीमारियाँ होने का खतरा अधिक रहता है। चेतन सिंह के अनुसार, जिन पशुओं की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) मज़बूत होती है, वे इन बीमारियों का मुकाबला आसानी से कर पाते हैं। पशुओं की अंदरूनी ताकत बढ़ाने के लिए, उन्हें पौष्टिक आहार और हरा चारा देना बहुत ज़रूरी है। यदि पशुपालक अपने पशुओं के खान-पान और रहने की जगह (आश्रय) के लिए पहले से ही उचित इंतज़ाम कर लें, तो भारी बारिश के दौरान भी उनके पशु सुरक्षित और स्वस्थ रहेंगे।



