छत्तीसगढ़

SSC, बैंक, रेलवे समेत 19 परीक्षाएं पास कर चर्चा में चारू पांडेय, मेहनत से रचा अनोखा रिकॉर्ड

By Admin|10 Jun 2026, 4:42 PM
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रायपुर 
किसी ने क्या खूब कहा है कि "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती". इस पंक्ति को छत्तीसगढ़ की एक होनहार बेटी चारू पांडे ने अपने जुनून से सच साबित कर दिया है. महज 23 साल की उम्र में चारू ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों एस्पिरेंट्स देखते हैं. उन्होंने SSC, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस समेत कुल 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी। 

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रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही रणनीति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
चारू पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिल्दा-नेवरा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से मैथमेटिक्स में बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू कर दी थी. चारू फिलहाल चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी उपलब्धियों की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है। 

किन परीक्षाओं में हासिल की सफलता
चारू ने SSC की कई प्रमुख परीक्षाएं जैसे SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD और SSC CPO को पास किया है. इसके अलावा उन्होंने IBPS PO, IBPS Clerk, SBI PO और SBI Clerk जैसी बैंकिंग परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की. रेलवे भर्ती बोर्ड की NTPC और ग्रुप-D परीक्षाएं भी उन्होंने पास कीं. वहीं पुलिस सेवाओं में दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर और ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता का परचम लहराया. इसके अलावा CG NHM सहित कई दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। 

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असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
चारू का सफर आसान नहीं था. शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. कई परीक्षाओं में चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और लगातार सुधार किया. चारू का मानना है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है. यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। 

सफलता का मंत्र क्या है?
चारू बताती हैं कि उनकी तैयारी का आधार सब्जेक्ट वाइज रणनीति, रेग्युलर मॉक टेस्ट और लगातार सेल्फ-इवैल्यूएशन रहा. वह हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों को एनालाइज करती थीं और अगली परीक्षा में उन्हें सुधारने की कोशिश करती थीं. उनका कहना है कि अगर छात्र लक्ष्य तय करें, समय को सही से मैनेज करें और लगातार मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है। 

चारू पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां मायने नहीं रखतीं. छोटे शहर की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए उम्मीद, संघर्ष और सफलता का प्रतीक बन चुकी है. उनकी उपलब्धि न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 

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