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Doctor Arrest Row: राजस्थान में OPD-IPD बंद, मरीजों पर संकट गहराया

By Admin|14 Apr 2026, 12:14 PM
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जयपुर

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राजस्थान में  आज (14 अप्रैल) से 24 घंटे तक पूरी तरह से प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ राज्य के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के इस ऐलान से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ने वाला है और इस हड़ताल से मरीजों का भी भारी दिक्कत होगी.

24 घंटे का हड़ताल का ऐलान
दरअसल, जयपुर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी हुई थी. उन्हें हाल ही में चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने मंगलवार से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में 24 घंटे की संपूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया.

जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह तक ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा लापरवाही का सबूत न मिलने के बावजूद सरकार ने मामूली अनियमितताओं के आधार पर यह दमनकारी कदम उठाया है. इस गतिरोध से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडरा रहा है.

IMA राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पहले गठित एक मेडिकल बोर्ड ने मामले में चिकित्सीय लापरवाही का कोई सबूत नहीं पाया था.

डॉक्टर सोनदेव बंसल की क्यों हुई गिरफ्तारी
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने डॉक्टर सोनदेव बंसल से जुड़े केस के बारे में बताया कि अक्टूबर 2025 में जितेन्द्र कुमार शर्मा ने मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दी कि उनकी मां शशि शर्मा को 01 सितंबर 2025 को निविक हॉस्पिटल में न्यूरो के इलाज के लिए भर्ती कराया था. अस्पताल ने उनकी माता का इलाज शुरू कर दिया और उनसे इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल कर लिये गये, जिनका आज तक कोई हिसाब किताब बिल रशीद नहीं दी. जितेंद्र ने रिपोर्ट में कहा कि उनकी मां का इलाज कुछ समय तक RGHS से भी किया गया और उनसे लाखों रुपये नकद भी लिए गए.

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इस दौरान अस्पताल प्रशासन आश्वासन देता रहा कि उनकी मां का इलाज अच्छा चल रहा है. हालांकि, कुछ दिनों बाद जितेंद्र की मां की मौत हो गई. जब जितेंद्र ने अपनी मां के इलाज के दस्तावेज और इलाज की रशीद व बिल मांगे तो अस्पताल ने देने से इनकार कर दिया. वही फ़र्जी फर्जी रिकार्ड तैयार किया गया.

पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि अस्पताल प्रबंधक ने आरजीएचएस कार्यालय में जितेंद्र की मां को इलाज के लिए बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती किया दिखाया. परिवादी की बिना सहमति से एक ही सहमति पत्र (consent form) पर कांट-छांट कर अलग-अलग डेट डालकर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किया गया. आरजीएचएस ऑफिस ने अस्पताल के खिलाफ जांच में अनियमितता के आरोप प्रमाणित माने है और एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार भी दस्तावेजों में कांटछांट करना प्रमाणित पाया जाने पर संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया गया.

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