उत्तर प्रदेशराज्‍य

क्राइम कंट्रोल से आगे बढ़ी पुलिसिंग, यूपी में सुरक्षा और जनता के भरोसे पर फोक

By Admin|17 Jun 2026, 6:01 PM
f X W

लखनऊ
यूपी जैसे बड़े स्टेट में लॉ एंड ऑर्डर का इम्पैक्ट हर घर, मार्केट, सड़क और रोज के कामकाज पर पड़ता है। अगर क्राइम बढ़ता है, तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है। बिजनेसमैन देर तक दुकान खोलने में डर महसूस करता है। महिलाएं बाहर निकलने में अनसेफ महसूस करती हैं। किसान और छोटे कारोबारी भी अपनी रोज की मूवमेंट में डर महसूस करते हैं। इसलिए क्राइम पर कंट्रोल केवल पुलिस का मुद्दा नहीं, बल्कि सोसायटी और विकास दोनों से जुड़ा मुद्दा है।

Advertisement
Advertisement

साल 2012 से 2017 के बीच UP में क्राइम और सिक्योरिटी को लेकर कई चिंताएं सामने आईं। हत्या, लूट, डकैती, दंगा, महिला सुरक्षा और ऑर्गनाइज्ड क्राइम जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे। UP पुलिस के Crime in UP 2016 डॉक्यूमेंट में भी 2012 से 2016 के बीच रिकॉर्ड हुए क्राइम में बढ़ोतरी दिखाई गई थी।

इस दौर ने यह साफ कर दिया कि इतने बड़े प्रदेश को ऐसा पुलिस सिस्टम चाहिए, जो तेज भी हो और लोगों के करीब भी हो। बाद के सालों में इसी जरूरत को ध्यान में रखकर पुलिसिंग को ज्यादा टेक्नोलॉजी बेस्ड, आसान और रिस्पॉन्सिबल बनाने पर काम हुआ।

UP 112 से तेज हेल्प, मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा, ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर सख्त एक्शन और टेक्नोलॉजी से मॉनिटरिंग जैसे स्टेप्स ने पुलिस सिस्टम को नई दिशा दी। अब गोल केवल इंसिडेंट के बाद एक्शन लेना नहीं रहा। गोल यह भी बना कि हेल्प समय पर पहुंचे, कंप्लेंट आसानी से हो और आम लोगों को भरोसेमंद माहौल मिले।

क्राइम की चिंता, आम जीवन पर चोट
जब क्राइम बढ़ता है, तो इम्पैक्ट केवल एक परिवार तक नहीं रहता। पूरा एरिया उसका असर महसूस करता है। मार्केट जल्दी बंद होने लगते हैं। रात में मूवमेंट कम हो जाती है। स्कूल, कॉलेज और काम पर जाने वाली महिलाओं और युवाओं के मन में डर बढ़ता है।

कई बार डर इतना बढ़ता है कि लोग कंप्लेंट दर्ज कराने से भी बचते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं परेशानी और न बढ़ जाए। इसलिए लॉ एंड ऑर्डर की असली ताकत केवल क्राइम के नंबर कम करने में नहीं है। असली ताकत लोगों के मन में भरोसा पैदा करने में है।

READ ALSO  MP के परिवारों की बढ़ी चिंता: नेपाल में फंसे 7 में से 2 सुरक्षित, 5 लोगों की तलाश तेज

जब परिवार सेफ महसूस करता है, तो बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर निकलते हैं। जब बिजनेसमैन सेफ महसूस करता है, तो मार्केट देर तक चलता है। जब किसान सेफ महसूस करता है, तो वह अपनी फसल मंडी तक भरोसे के साथ ले जाता है।

नई पुलिसिंग, जनता से मजबूत कनेक्टिंग
उत्तर प्रदेश में बाद के सालों में पुलिसिंग को ज्यादा तेज, टेक्नोलॉजी बेस्ड और जनता के करीब बनाने पर जोर दिया गया। क्राइम पर सख्ती, माफिया पर एक्शन, गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रॉपर्टी जब्ती, UP 112 और महिला सुरक्षा जैसे स्टेप्स इसी बदलाव का हिस्सा बने।

इस बदलाव का गोल केवल क्रिमिनल्स पर एक्शन लेना नहीं था। गोल यह भी था कि कंप्लेंट जल्दी सुनी जाए, हेल्प समय पर पहुंचे और आम लोगों को लगे कि पुलिस उनके साथ खड़ी है।

जब पुलिस सिस्टम लोगों तक आसानी से पहुंचता है, तो भरोसा बढ़ता है। जब भरोसा बढ़ता है, तो लोग कंप्लेंट करने से डरते नहीं। यही बदली पुलिसिंग का बड़ा इम्पैक्ट है।

UP 112 से तेज हेल्प, संकट में मिला साथ
किसी भी मुश्किल समय में सबसे जरूरी चीज होती है जल्दी हेल्प। सड़क हादसा हो, झगड़ा हो, महिला सुरक्षा से जुड़ी कंप्लेंट हो या कोई और इमरजेंसी हो, तेज पुलिस हेल्प लोगों को बड़ा सपोर्ट देती है।

UP 112 इसी जरूरत को पूरा करने वाला सिस्टम है। इसका गोल पुलिस असिस्टेंस को जल्दी से लोगों तक पहुंचाना है। इससे हेल्प केवल बड़े शहरों तक लिमिटेड नहीं रही। गांवों, कस्बों और दूर के इलाकों तक भी इमरजेंसी पुलिस सर्विस पहुंचाने की कोशिश हुई।

UP 112 के ऑफिशियल इंट्रोडक्शन डॉक्यूमेंट के अनुसार, इस सिस्टम ने लॉन्च के बाद 4.3 करोड़ से अधिक इंसिडेंट्स पर रिस्पॉन्स दिया। रोज औसतन 90,000 कॉल का जवाब दिया जाता है और करीब 19,500 इंसिडेंट्स पर एक्शन होता है।

कॉल पर जवाब, हेल्प का साथ, UP 112 ने आसान की सुरक्षा की राह।
यह बताता है कि पुलिस हेल्प अब केवल थाने पर निर्भर नहीं है। कंट्रोल रूम, व्हीकल नेटवर्क और टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिसिंग अब प्रदेश स्तर पर जुड़कर काम कर रही है

READ ALSO  जनता को मुख्यमंत्री का आश्वासन, बोले- परेशान होने की जरूरत नहीं, हर समस्या सुलझेगी

ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर वार, भरोसे को आधार
ऑर्गनाइज्ड क्राइम किसी भी स्टेट के लिए बड़ी चुनौती होता है। यह केवल एक क्रिमिनल या एक इंसिडेंट तक लिमिटेड नहीं रहता। इसमें जमीन कब्जा, रंगदारी, धमकी, अवैध कमाई और लोकल प्रेशर जैसे कई रूप शामिल होते हैं।

ऐसे क्राइम से आम लोगों में डर बढ़ता है। बिजनेसमैन अपने काम को लेकर अनसेफ महसूस करता है। जमीन, बिजनेस और रोजमर्रा के फैसलों पर भी इसका इम्पैक्ट पड़ता है

उत्तर प्रदेश में ऐसे क्राइम पर एक्शन के लिए गैंगस्टर एक्ट और प्रॉपर्टी जब्ती जैसे स्टेप्स अपनाए गए। India Code पर उपलब्ध कानून की धारा 14 में ऐसी प्रॉपर्टी जब्त करने का प्रावधान है, जो क्राइम से जुड़ी एक्टिविटीज से कमाई गई मानी जाए।

इस तरह के एक्शन का मैसेज साफ है। क्राइम से कमाई गई प्रॉपर्टी सुरक्षित नहीं रहती। इससे क्रिमिनल्स पर फाइनेंशियल प्रेशर बनता है और लोकल लेवल पर डर का माहौल कम करने में मदद मिलती है। क्राइम पर वार, भरोसे को आधार, जनता को मिला सुरक्षित संसार।

वीमेन सेफ्टी को सपोर्ट, सोसायटी का भरोसा मजबूत
लॉ एंड ऑर्डर की मजबूती तब सबसे ज्यादा दिखती है, जब महिलाएं सेफ महसूस करें। बेटी स्कूल जाए, छात्रा कॉलेज जाए, महिला काम पर जाए या परिवार के साथ मार्केट जाए, हर जगह सुरक्षा का भरोसा जरूरी है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन 18 अगस्त 2020 को स्थापित किया गया। यह संगठन महिलाओं और बच्चों से जुड़े क्राइम की रोकथाम और सेफ माहौल बनाने के लिए काम करता है। इसके तहत महिला पावर लाइन 1090, महिला सम्मान प्रकोष्ठ, मिशन शक्ति, सेफ सिटी प्रोजेक्ट और ITSSO जैसे कई प्रोग्राम शामिल हैं।

मिशन शक्ति ने महिला सुरक्षा को केवल हेल्पलाइन तक लिमिटेड नहीं रखा। इसके जरिए गांवों, वार्डों, स्कूलों, कॉलेजों और पब्लिक प्लेसेज तक अवेयरनेस पहुंचाई गई। मिशन शक्ति 5.0 से जुड़े डिटेल्स के अनुसार, महिला बीट सिस्टम, गांव-गांव कनेक्ट और कंप्लेंट्स के जल्दी सॉल्यूशन पर ध्यान दिया गया।

इससे पुलिस और महिलाओं के बीच डायरेक्ट कनेक्ट बढ़ा। जब महिला को कंप्लेंट का रास्ता आसान लगता है, तो उसका भरोसा बढ़ता है। जब महिला सेफ महसूस करती है, तो पूरा परिवार और सोसायटी मजबूत होती है।

READ ALSO  फाइल अटकाई तो कार्रवाई तय! MP के नए ‘ऑटो एस्कलेशन’ कानून में अफसरों पर सख्ती

टेक्नोलॉजी से मॉनिटरिंग, पुलिसिंग में आसानी
आज की पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी का रोल बहुत बड़ा है। कंट्रोल रूम, CCTV, ऑनलाइन कंप्लेंट, डिजिटल रिकॉर्ड, केस ट्रैकिंग और महिला सुरक्षा पोर्टल जैसे सिस्टम पुलिस कामकाज को ज्यादा आसान और तेज बनाते हैं।

टेक्नोलॉजी से कंप्लेंट्स पर नजर रखना आसान होता है। अधिकारियों को यह पता चलता है कि किस केस में क्या एक्शन हुआ और कहां स्पीड की जरूरत है। इससे पुलिस सिस्टम ज्यादा ऑर्गनाइज्ड तरीके से काम कर पाता है।

महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के अनुसार, ITSSO पोर्टल का उद्देश्य यौन अपराधों की जांच को तय समय में पूरा करने की मॉनिटरिंग करना है। इसी तरह सेफ सिटी प्रोजेक्ट में CCTV, पिंक बूथ, पिंक स्कूटी, पिंक SUV और स्मार्ट कंट्रोल रूम जैसे सिस्टम शामिल हैं।

टेक्नोलॉजी से जुड़ी ये फैसिलिटीज पुलिसिंग को मॉडर्न बनाती हैं। इससे शहरों और पब्लिक प्लेसेज पर सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलती है।

पुलिसिंग में भरोसा, विकास को मिला हौसला
2012 से 2017 के बीच क्राइम और सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं ने यह साफ कर दिया था कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े स्टेट को सामान्य पुलिसिंग से आगे बढ़कर तेज और रिस्पॉन्सिबल सिस्टम की जरूरत है।

इसके बाद UP 112, मिशन शक्ति, महिला बीट, सेफ सिटी, गैंगस्टर एक्ट के तहत एक्शन और टेक्निकल मॉनिटरिंग जैसे स्टेप्स ने पुलिस सिस्टम को ज्यादा तेज, आसान और लोगों के नजदीक बनाने में मदद की।

इस बदलाव का इम्पैक्ट केवल क्राइम कंट्रोल तक लिमिटेड नहीं है। जब लोगों को समय पर हेल्प मिलती है, तो भरोसा बढ़ता है। जब महिलाएं कंप्लेंट दर्ज कराने में आसानी महसूस करती हैं, तो सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। जब बिजनेसमैन अपने काम को सेफ मानता है, तो मार्केट चलता है। जब आम परिवार बिना डर बाहर निकलता है, तभी लॉ एंड ऑर्डर विकास का मजबूत बेस बनता है।

सुरक्षा से भरोसा, भरोसे से विकास, बदली पुलिसिंग से मजबूत हुआ प्रदेश का विश्वास।

 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins