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CG : रायपुर POCSO कोर्ट ने छह आरोपियों और पुलिसकार्मियों को जारी किया नोटिस …

By kadwaghut|12 May 2026, 12:30 PM
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रायपुर। राजधानी रायपुर के चतुर्थ फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO) ने एक अहम मामले में छह पुलिसकर्मियों और एक ट्रांसजेंडर आरोपी को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। यह कार्रवाई परिवादिनी सुनीता पांडेय द्वारा दायर परिवाद पत्र पर सुनवाई के दौरान की गई। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गिरीश कुमार मंडावी की अदालत में हुई, जहां अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत आरोपियों को संज्ञान लेने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर देने के निर्देश दिए हैं।

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जानकारी के अनुसार, परिवाद अधिवक्ता आशीष कुमार मिश्रा के माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। परिवाद में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें माना थाना में पदस्थ एएसआई शंकर ध्रुव, क्राइम ब्रांच रायपुर के मुकेश सोरी, सबूरी शंकर और मुनीर रज़ा, डीडी नगर थाना की नीलम कुजूर तथा कांस्टेबल मुकेश बांधे शामिल हैं। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि इन सभी ने मिलकर गंभीर आपराधिक कृत्य किए, जिसके चलते न्यायालय से कठोर धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है।

परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई गंभीर धाराओं को लागू करने की मांग की गई है। इनमें धारा 324, 332, 333, 294, 115(2), 127(2), 331(2), 135, 75(1)(w), 76 और 79 शामिल हैं। इसके अलावा POCSO एक्ट की धारा 12 और किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निवेदन अदालत से किया गया है। मामले की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए सभी आरोपियों को परिवाद पत्र एवं संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि किसी भी मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपियों को सुनवाई का अवसर देना कानूनन आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर अगली तारीख पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को तय की गई है। इस दिन सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर संज्ञान से पहले अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। न्यायालय के इस आदेश के बाद मामला कानूनी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, परिवाद में पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आने से मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि यदि अदालत प्रारंभिक सुनवाई के बाद आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाती है, तो संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। फिलहाल सभी की नजरें 14 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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