मध्य प्रदेश

योजना के अंतर्गत राज्य सरकार को लगभग 19 हजार करोड़ रूपये की केंद्रीय सहायता

By Admin|17 Mar 2026, 8:16 PM
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भोपाल 

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प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्री-मंडल ने जल जीवन मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसे जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित कर लागू करने को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के साथ सेवा आधारित, टिकाऊ और पारदर्शी प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मिशन के लिए कुल व्यय बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार की सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये होगी।

जल जीवन मिशन 2.0 योजना के पहले ही दिन मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय से इस संबंध में एमओयू किया, जिसके तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय पेयजल योजना के लिए पाइपलाइन बिछाने से लेकर पूरी अधोसंरचना का निर्माण करना जिससे पेयजल हर ग्रामीण तक पहुंच सके। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायत की साझेदारी से जलापूर्ति और जल संचयन छोटे-छोटे गांव तक पहुँचाना है।

जल शक्ति मंत्रालय में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी,आर पाटील , जल शक्ति राज्यमंत्री  वी. सोमन्ना और मध्य प्रदेश की ओर से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपत्तिया उइके, प्रमुख सचिव  पी. नरहरि सहित केंद्र और राज्य के आला अधिकारी एमओयू के दौरान मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 के अनुमोदन के लिए वे प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सभी ग्रामीण नल-जल योजनाओं का गुणवत्ता के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है और निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी के साथ “हर घर जल प्रमाणित” ग्राम पंचायतों में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के विभिन्न घटकों का निरीक्षण कर “जल आकलन” किया जा रहा है, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में पूर्ण हुई योजनाओं का हस्तांतरण निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से “जल अर्पण” उत्सव के रूप में किया जा रहा है। देश का पहला “जल अर्पण” उत्सव 23 दिसंबर 2025 को राजगढ़ जिले के कुंडीबेय गांव में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8 मार्च से 22 मार्च तक “जल महोत्सव” के अंतर्गत जल संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही राज्य मंत्रि-परिषद ने “मध्यप्रदेश पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति), 2026” को मंजूरी देकर ग्राम पंचायतों को योजनाओं के संचालन और रखरखाव में सशक्त बनाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी आर पाटिल के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के सभी कार्य पूर्ण कर प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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यह एमओयू प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल से जल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, सेवा गुणवत्ता में सुधार, समयबद्ध लक्ष्यों की प्राप्ति, डिजिटल निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को केवल अवसंरचना विस्तार तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण, पंचायतों की भागीदारी और सेवा की निरंतरता पर समान रूप से बल देगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के नेतृत्व में विभाग सेवा गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना पर आगे बढ़ रहा है।

 

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