छत्तीसगढ़

पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी, राजधानी में 7 IPS अधिकारियों को ड्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी

By Admin|09 Sep 2025, 6:11 PM
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रायपुर

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रायपुर में एक नवंबर से लागू होने वाले पुलिस कमिश्नरेट पर काम शुरू हो गया है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार के निर्देश पर डीजीपी अरुणदेव गौतम ने सीनियर एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में सात आईपीएस अधिकारियों की कमेटी बनाई है, जिसने ड्राफ्ट पर काम प्रारंभ कर दिया है.

एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में बनाई गई समिति में पुलिस महानिरीक्षक (नारकोटिक्स) अजय यादव, पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक (अअवि) ध्रुव गुप्ता, उप पुलिस महानिरीक्षक (दूरसंचार) अभिषेक मीणा, उप पुलिस महानिरीक्षक (सीसीटीएनएस) संतोष सिंह और , पुलिस अधीक्षक (विआशा) प्रभात कुमार बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं. इसके अतिरिक्त वैधानिक पहलुओं के संबंध में आवश्यकता पड़ने पर लोक अभियोजन संचालनालय में संयुक्त संचालक मुकुला शर्मा को टीम में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.

कमेटी इस बात पर मंथन करेगी कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम को छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट 2007 के प्रावधानों के अनुसार बनाया जाए या फिर इसके लिए अलग से एक्ट बनाया जाए. सरकार अगर अलग से एक्ट बनाना चाहेगी तो फिर इसके लिए दो रास्ते हैं. पहला विधानसभा से अधिनियम पारित कराया जाए. या फिर राज्यपाल से अध्यादेश जारी कराना. चूंकि राज्योत्सव के मौके पर रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरुआत होनी है, ऐसे में कई राज्यों के सिस्टम का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में बेस्ट ड्राफ्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

क्या है पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली?
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पहले से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, इंदौर जैसे बड़े महा नगरों में लागू है. इसमें शहर की कमान किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को दी जाती है, जो आमतौर पर डीजी, एडीजी या आईजी रैंक के हो सकते हैं. कौन-सा अधिकारी बैठेगा, यह राज्य सरकार तय करती है और यह शहर की जनसंख्या व क्राइम रिकॉर्ड पर निर्भर करता है.

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पुलिस आयुक्त के अधिकार और जिम्मेदारियां
कमिश्नर के पास ऐसे कई अधिकार होंगे जो वर्तमान में कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के पास होते हैं, जैसे-

धारा 144 या कर्फ्यू लगाने का निर्णय
धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना
आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई
बड़े सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति
जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का आदेश
इससे पुलिस को किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी और कलेक्टर पर निर्भरता खत्म हो जाएगी.

कलेक्टर के अधिकार हो जाएंगे सीमित

कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद कलेक्टर के अधिकार भी सीमित हो जाएंगे. वह सिर्फ रेवेन्यू का काम देखेंगे, जबकि अन्य अनुमति संबंधी कार्य कमिश्नर के हाथों में होंगे.

एसपी और आईजी का क्या होगा?
कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद जिले में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी कमिश्नर के हाथों में होगी. यदि सरकार चाहेगी तो, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से एसपी (रूरल) की नियुक्ति हो सकती है. अगर पूरा जिला कमिश्नरेट के तहत आता है तो एसपी रैंक के अधिकारियों को डीसीपी बनाया जा सकता है.

फिलहाल, सीएम विष्णुदेव साय ने केवल इसकी घोषणा की है. अधिकारों का दायरा और तैनाती की प्रक्रिया आने वाले दिनों में तय होगी. रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई है.

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