मध्य प्रदेशराज्‍य

निगम का एक्शन प्लान: गिरते भूजल स्तर के लिए 15 हजार इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग

By Admin|08 May 2026, 10:31 AM
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इंदौर 
इंदौर में गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ ही पानी की किल्लत विकराल रूप धारण करने लगी है। स्थिति यह है कि नर्मदा के नलों में अब कम दबाव से पानी की आपूर्ति हो रही है और शहर के 30 से 40 प्रतिशत इलाकों में बोरिंग भी पूरी तरह सूख चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने भूजल स्तर सुधारने और बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया है। निगम प्रशासन ने अब शहर के तमाम आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। अभियान के पहले चरण में 600 से अधिक बहुमंजिला इमारतों और बड़े भवनों को चिह्नित कर नोटिस थमाए गए हैं। आगामी दो महीनों के भीतर निगम ने 15,000 भवनों में यह सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है और आम नागरिकों से भी इसे स्वेच्छा से अपनाने की अपील की जा रही है। 

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शहरी क्षेत्रों में जमीन के भीतर का पानी खत्म होता जा रहा
बढ़ती हुई आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए नर्मदा के चौथे चरण का कार्य तो प्रारंभ कर दिया गया है, परंतु सबसे बड़ी चुनौती पानी की वास्तविक उपलब्धता को लेकर बनी हुई है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि पानी की टंकियों को पूर्व की भांति ही भरा जा रहा है, किंतु धरातल पर परिस्थितियां इसके विपरीत नजर आ रही हैं। शहरी क्षेत्रों में जमीन के भीतर पानी का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। इसी गिरावट को रोकने के उद्देश्य से नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्जिंग की व्यापक पहल की है।

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भूजल स्तर में सुधार के लिए दीर्घकालिक योजना
भूजल बोर्ड की हालिया रिपोर्ट में निगम के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, पानी का दोहन प्रतिशत 119 से कम होकर 117 पर आ गया है। भविष्य की जरूरतों और जल संकट के स्थाई समाधान के लिए निगम ने लंबी अवधि की योजना पर ध्यान केंद्रित किया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, बड़ी इमारतों में इस प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में लगभग 800 भवन स्वामियों और मल्टी संचालकों ने सूचित किया है कि उन्होंने सिस्टम लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए 30 जून तक की समय सीमा तय की गई है।

निर्माण कार्यों और व्यावसायिक उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लागू किए
बढ़ती गर्मी में घरेलू खपत के साथ-साथ निर्माण कार्यों और गैरेज जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में पानी का बेतहाशा उपयोग हो रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने निर्माण कार्यों और ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों पर बोरिंग या नर्मदा जल के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इसके विकल्प के रूप में निगम ने शहर के 35 अलग-अलग स्थानों पर ट्रीटेड वॉटर के हाईडेंट पॉइंट बनाए हैं, जहां से व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी लिया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त कार धोने या किसी भी रूप में पानी का दुरुपयोग करने वालों पर चालानी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। ज्ञात हो कि निगम ने दो वर्ष पूर्व भी एक लाख वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का बड़ा अभियान चलाया था। 

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