मध्य प्रदेश

भोपाल एक जीवित विरासत वाला नगर, यहां अतीत और वर्तमान संवाद के साथी : पर्यटन मंत्री लोधी

By Admin|18 Nov 2025, 9:18 PM
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हिस्टोरिक सिटी सीरीज की भोपाल कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम

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भोपाल 
भोपाल की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य, साहित्यिक धरोहर, सांस्कृतिक बहुलता तथा यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग द्वारा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट सहयोग से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भारत के चयनित ऐतिहासिक नगरों की परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य और वैचारिक दर्शन से देश की युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा यह श्रृंखला आयोजित की जा रही है। यह गर्व का विषय है कि इस प्रतिष्ठित आयोजन में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा एवं भोपाल तीनों को शामिल किया गया है।

राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भोपाल केवल एक शहर नहीं, बल्कि समय, स्मृति, साहित्य, कला और मानव अन्वेषण की अनेक परतों से निर्मित एक जीवंत विरासत है। उन्होंने कहा कि भोपाल की झीलों, पहाड़ियों, बस्तियों और सांस्कृतिक धरोहरों में वह गहराई और दर्शन छिपा है, जो किसी नगर को सिर्फ भौतिक संरचना नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना बनाता है। भोपाल यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रहा है, जो शहर की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि का वैश्विक सम्मान है।

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अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। ओरछा, ग्वालियर और भोपाल के साथ–साथ प्रदेश के अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरों को भी संस्थाओं और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटकों के अनुकूल विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। व्यापक सहयोग और योजनाबद्ध पहल से प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।

पैलन डिस्कशन में डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में भोपाल का नामांकन उसकी अद्वितीय विरासत को सम्मानित करता है। यहां हिंदी और उर्दू समान रूप से पल्लवित होती हैं, जहां अकादमियां और विश्वविद्यालय समृद्ध सांस्कृतिक संवाद के वाहक हैं और जहां विरासत की पहचान केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि यहां के लोगों से भी तय होती है। यहां साहित्य केवल संरक्षित नहीं किया जाता, बल्कि उसे जिया जाता है और समुदाय द्वारा निरंतर आकार दिया जाता है।  

श्री प्रशांत बघेल, संयुक्त संचालक (प्लानिंग), मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि भोपाल में सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की अत्यंत मजबूत संभावनाएं हैं। शहर की सांस्कृतिक बनावट, उसकी समृद्ध भाषाई विरासत और सक्रिय साहित्यिक समुदाय इसे इस श्रेणी के लिए विशिष्ट बनाते हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2026 तक हम यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क के लिए एक और अधिक सशक्त, सुविचारित और प्रमाणित नामांकन प्रस्तुत करने के लिए पूर्णतः तैयार होंगे।  

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इस अवसर पर डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल के डायरेक्टर प्रोफेसर कैलासा राव, मैनिट की एसोसिएट प्रोफेसर श्रीमती सविता राजे, एनएमए के रीजनल डायरेक्टर डॉ. टी. अरुण राज,  द्रोणा फाउंडेशन से सुश्री तपस्या एवं सुश्री मल्लिका, प्रोफेसर रचना खरे उपस्थित थे। 

हेरिटेज वॉक में जाना भोपाल का सांस्कृतिक महत्व
भोपाल में एक विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया, जिसने शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कराने का अवसर प्रदान किया। यह वॉक गौहर महल से प्रारंभ होकर इक़बाल मैदान होते हुए भव्य मोती महल तक आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने इन स्थलों की वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से जाना। इसमें प्रतिभागियों को भोपाल के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक विरासत और स्थापत्य विशेषताओं से अवगत कराया गया।

हिस्टोरिक सिटी सीरीज
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) द्वारा देश के चयनित ऐतिहासिक एवं जीवित नगरों की विरासत, पारम्परिक शहरी योजना और सांस्कृतिक विशेषताओं से आमजन को परिचित कराने के लिये हिस्टोरिक सिटी सीरीज (Historic City Series–2025) का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय पहल में मध्यप्रदेश के तीन ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा और भोपाल को चुना गया है। श्रृंखला के अंतर्गत 11 नवंबर को ग्वालियर और 13 नवंबर को ओरछा में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 

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