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पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी तो दर्ज हुई FIR, JPSC-JSSC आंदोलन फिर तेज होने के आसार

By Admin|15 Sep 2026, 5:01 PM
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रांची

रांची में 21 अगस्त को पुलिस और छात्रों की झड़प के बाद JPSC-JSSC आंदोलन के नेताओं समेत 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों पर शनिवार 22 अगस्त को FIR दर्ज की गई है। इससे छात्र आंदोलन फिर से शुरू होने की आशंका है।

झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, प्रशासन के तय रूट का पालन नहीं करने और पुलिस से भिड़ने के आरोप हैं।

JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रमुख नेता नामजद
रांची के कोतवाली थाने में दर्ज मामलों में JPSC-JSSC Reforms Manch के नेताओं कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान के नाम शामिल हैं। रांची सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, शुक्रवार की झड़प के संबंध में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 14 नामजद आरोपियों के अलावा 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मंच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीन में से एक FIR पुलिस की ओर से दर्ज की गई है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बाकी दो FIR व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि हिंसा या कथित उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

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नेताओं के पुतले जलाने को लेकर विवाद
21 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ा। कोतवाली थाना प्रभारी सानोज चौधरी ने भी झड़प की वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा निर्धारित रूट का पालन नहीं करना बताया।

वहीं, JPSC-JSSC Reforms Manch के नेता कुणाल सिंह ने पुलिस के आरोप से अलग दावा किया है। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हिंसा शुरू की। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है और FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सिर्फ रांची नहीं, चार जिलों में टकराव

छात्रों की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतला दहन अभियान को राज्य के कई हिस्सों में विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, रांची के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह और गढ़वा में भी प्रदर्शन के दौरान टकराव हुआ। हजारीबाग में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यानी 21 अगस्त का विवाद केवल रांची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और विरोध आमने-सामने आ गए।

JPSC-JSSC विवाद क्या है?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारी CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठा चुके हैं। छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे थे।

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इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर भी हुए हैं। 8 अगस्त को सरकार और JPSC-JSSC Reforms Manch के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।

हाईकोर्ट के फैसलों के बाद विवाद और बढ़ा
इस पूरे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। इससे एक दिन पहले अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने लंबे छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए थे, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। JPSC-JSSC Reforms Manch ने सरकार पर अदालत के सामने कमजोर पक्ष रखने और इसे “कानूनी ड्रामा” बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आंदोलनकारियों का आरोप है, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में उस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

आंदोलन पर बढ़ता पुलिस दबाव
रांची में ताजा FIR ऐसे समय दर्ज हुई हैं जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था तथा पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 11 अगस्त को ABVP के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस से झड़प हुई थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
अब 21 अगस्त की घटना में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र संगठन भर

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