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UP आउटसोर्स सेवा निगम की नई व्यवस्था: पारदर्शी भर्ती, पूरा वेतन और सेवा सुरक्षा के लिए 4-स्तरीय निगरानी

By Admin|05 Sep 2026, 1:52 PM
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लखनऊ
आउटसोर्स कार्मिकों के लिए लागू की गई नई व्यवस्था में मौजूदा पारिश्रमिक को सुरक्षित रखने के साथ ही एजेंसियों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया गया है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) ने चार श्रेणियों में कार्मिकों को बांटकर न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया है। यदि किसी विभाग में किसी कार्मिक को इससे अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है तो उसे नई व्यवस्था लागू होने के बाद घटाया नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा पारिश्रमिक ही मिलता रहेगा।

निगम आउटसोर्सिंग व्यवस्था को महज एजेंसी के जरिए कर्मचारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बजाय नियामक व्यवस्था के रूप में काम करेगा। यह एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखेगा और कार्मिकों को बिना किसी कटौती के पूरा पारिश्रमिक दिलाने की व्यवस्था करेगा। साथ ही सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय निकायों को आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निगम की ही होगी।

निगम ने आउटसोर्स कार्मिकों के लिए जो चार श्रेणियां तय की हैं उनमें श्रेणी-1 (हाईली स्किल्ड) के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये, श्रेणी-2 (स्किल्ड/टेक्निकल) के लिए 25 हजार, श्रेणी-3 (सेमी-स्किल्ड) के लिए 22 हजार और श्रेणी-4 (सपोर्ट स्टाफ) के लिए 20 हजार रुपये का न्यूनतम पारिश्रमिक प्रस्तावित है। मसलन, चिकित्सक, अभियंता और वास्तुविद श्रेणी-1 में, जबकि नर्स, फार्मासिस्ट, डाटा प्रोसेसिंग और ड्राइविंग से जुड़े पद श्रेणी-2 में रखे गए हैं।

आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती में भी पारदर्शिता लाने का प्रविधान है। विभाग पहले अपनी मांग और आरक्षण नियमों के साथ निगम को भेजेगा। इसके बाद सेवायोजन पोर्टल से छंटनी की जाएगी, फिर 100 अंकों की चयन प्रणाली के आधार पर चयन होगा। अंत में कार्मिक को यूनिक कोड व आइडी कार्ड दिया जाएगा। 50 अंक लिखित परीक्षा, 25 अंक अधिमानी अर्हता, 15 अंक स्थानीय निवासी और 10 अंक विशेष महिला आरक्षण के लिए रखे गए हैं।

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आउटसोर्स कर्मियों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रविधान हैं। व्यवस्था की निगरानी के लिए राज्य/निदेशालय, मंडल, जिला और स्थानीय निकाय स्तर पर चार-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां कार्मिकों की अर्हता का सत्यापन कर पात्र सूची आउटसोर्स एजेंसी को भेजेंगी। इससे भर्ती, तैनाती और एजेंसी के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर निगरानी का तंत्र मजबूत होगा।

नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है आउटसोर्स व्यवस्था नियमित सरकारी सेवाओं का विकल्प नहीं है। आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं सृजित/नियमित पदों के विरुद्ध नहीं ली जाएंगी और इसे नियमित रोजगार का दावा नहीं माना जाएगा।

विभागों को आउटसोर्स मद में पर्याप्त बजट का प्रविधान भी करना होगा। निगम की स्थापित व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा।

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